होम लोन के लिए जरूरी है यह कागज, मकान खरीदने से पहले मालिक से जरूर मांगें

ई दिल्‍ली. होम लोन के लिए अलॉटमेंट लेटर (letter Of Allotment) भी एक अहम डॉक्‍यूमेंट है. अलॉटमेंट लेटर डेवलपर या हाउसिंग अथॉरिटी द्वारा दिया जाता है. इसमें किसी भी प्रॉपर्टी जैसे घर, प्‍लॉट या फ्लैट का पूरा विवरण होता है.

अलॉटमेंट लेटर प्रॉपर्टी के पहले खरीदार को मिलता है. जब वह आगे उसे बेचता है तो अगले खरीदार को अलॉटमेंट लेटर की कॉपी दे देता है. होम लोन देते वक्‍त बहुत से बैंक अलॉटमेंट लेटर को अहमियत देते है. इसकी वजह यह है कि इस लेटर से प्रॉपर्टी का लीगल वेरीफिकेशन करना आसान हो जाता है. साथ ही पता चल जाता है कि प्रॉपर्टी विवादित नहीं है.

अब सवाल यह उठता है कि जिस व्‍यक्ति से प्रॉपर्टी खरीदी जा रही है, अगर उससे अलॉटमेंट लेटर गुम हो गया है, तो क्‍या बैंक खरीदी गई प्रॉपर्टी पर होम लोन देगा? यहां गौर करने वाली बात यह है कि अलग-अलग बैंकों के अलग-अलग मानदंड हैं. एक बैंक किसी एक दस्‍तावेज के बिना किसी मकान के लिए लोन नहीं देता लेकिन दूसरा बैंक उस डॉक्‍यूमेंट के बिना भी ऋण मंजूर कर देता है. ऐसा इसलिए है क्‍योंकि अलग-अलग बैंकों ने लोन असेस्‍मेंट के लिए अलग कसौटियां बना रखी हैं. बिना अलॉटमेंट लेटर के कुछ बैंक होम लोन नहीं देते, कुछ बैंक अन्‍य कागजात पर लोन अप्रूव कर देते हैं.

हर बैंक का अपना नियम

कुछ बैंक अलॉटमेंट लेटर मूल मालिक से खो जाने के बाद सार्वजनिक नोटिस देने और क्षतिपूर्ति बांड जमा कराकर प्राप्‍त की गई प्रमाणित कॉपी के होने पर होम लोन दे देते हैं. वहीं, कुछ बैंक कुछ अन्‍य औपचारिकताओं को पूरा करवाते हैं. मूल आवंटन पत्र खोने के बाद मकान मालिक ई-एफआईआर (e-FIR) दर्ज कराकर और और क्षतिपूर्ति बांड (Indemnity Bond) जमा करके अलॉटमेंट लेटर की प्रमाणित प्रति (certified true copy-CTC) ले सकता है.

मकान खरीदने से पहले करें ये काम

अगर आप भी कोई ऐसा मकान खरीदना चाहते हैं, जिसके मालिक के पास मूल आवंटन पत्र नहीं है तो सबसे पहले आपको बैंक से संपर्क करना चाहिए. उससे पूछना चाहिए कि क्‍या बैंक मूल आवंटन पत्र के बिना लोन दे देगा. साथ ही इस बात की भी जांच करें कि क्‍या मकान या फ्लैट के वर्तमान मालिक ने मूल आवंटन पत्र खोने के संबंध में अंग्रेजी और एक स्‍थानीय भाषा के समाचार-पत्र में मूल आवंटन पत्र खोने के विषय में नोटिस दिया था.

सामान्‍यत: दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का समय 7-21 दिन का होता है. वहीं अगर मकान मालिक का मकान पर लगातार 12 साल से कब्‍जा है तो वह उस मकान का स्‍वामित्‍व साबित करने के लिए एक अच्‍छा प्रमाण है. इसे बैंक काफी महत्‍व देते हैं और होम लोन लेने में यह काफी सहायक साबित होता है