रायपुर/नई दिल्ली, 31 मई 2025 — बहुचर्चित छत्तीसगढ़ कोयला घोटाले में गिरफ्त में आए 6 आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। इनमें वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रानू साहू और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पूर्व उपसचिव सौम्या चौरसिया भी शामिल हैं। सौम्या को दिसंबर 2022 में गिरफ्तार किया गया था, जबकि रानू साहू की गिरफ्तारी जुलाई 2023 में हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच — जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस दीपांकर दत्ता — ने सुनवाई के दौरान गवाहों को प्रभावित करने की आशंका को गंभीरता से लिया। इसी आधार पर कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी आरोपी अगले आदेश तक छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा में नहीं रहेंगे।
क्या हैं जमानत की शर्तें?
सभी आरोपियों को अपनी रिहाई के एक सप्ताह के भीतर अपने राज्य के बाहर का पता संबंधित थाने और जांच एजेंसी को देना होगा।
सभी को अपना पासपोर्ट विशेष अदालत में जमा करना होगा।
जांच एजेंसियों के बुलावे पर उन्हें उपस्थित होना पड़ेगा और पूरा सहयोग देना होगा।
ईडी का दावा: 570 करोड़ से ज्यादा की अवैध वसूली
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन और परमिट प्रणाली में भारी गड़बड़ी का खुलासा किया है। ईडी के अनुसार, कोयले के परिवहन और ऑनलाइन परमिट को जानबूझकर ऑफलाइन कराकर व्यापारियों से कथित रूप से 570 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध उगाही की गई।
एफआईआर के अनुसार, यह घोटाला जुलाई 2020 में शुरू हुआ जब तत्कालीन खनिज निदेशक समीर विश्नोई ने परमिट प्रक्रिया को ऑफलाइन करने का आदेश जारी किया। इस घोटाले में अब तक कुल 36 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
क्या है आगे की राह?
हालांकि आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिल गई है, लेकिन कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जांच और ट्रायल प्रक्रिया में बाधा नहीं आनी चाहिए। सभी आरोपियों को जरूरत पड़ने पर ट्रायल कोर्ट और जांच एजेंसी के समक्ष पेश होना होगा।
छत्तीसगढ़ कोल स्कैम की गूंज आने वाले समय में भी तेज रहने की संभावना है क्योंकि इस मामले में कई रसूखदार नाम शामिल हैं, और ईडी की जांच अब भी जारी है।
