युक्तियुक्तकरण में अनियमितता पर हाईकोर्ट सख्त – शिक्षकों को आंशिक राहत, समिति को 16 जून तक फैसला लेने का आदेश

🔴 युक्तियुक्तकरण में अनियमितता पर हाईकोर्ट सख्त – शिक्षकों को आंशिक राहत, समिति को 16 जून तक फैसला लेने का आदेश 🔴

रायपुर, 12 जून 2025 —
शिक्षा विभाग की युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में भारी गड़बड़ियों को लेकर प्रदेशभर में दायर 70 याचिकाओं पर आज छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई।
जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की एकल पीठ ने शिक्षकों को आंशिक राहत देते हुए 3 दिन के भीतर जिला स्तरीय समिति के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की अनुमति दी है। इसके साथ ही समिति को निर्देश दिया गया है कि वह 16 जून तक इन मामलों पर निर्णय ले।

📌 केवल कार्यभार ग्रहण न करने वाले शिक्षकों को राहत

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह अंतरिम राहत केवल उन्हीं शिक्षकों को मिलेगी, जिन्होंने युक्तियुक्तकरण के बाद नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया है।
हालांकि, जिन्होंने पहले ही नई जगह ज्वाइन कर लिया है, वे भी जिला स्तरीय समिति के समक्ष अभ्यावेदन के माध्यम से अपना पक्ष रख सकते हैं।

⚠️ क्या है मामला?

प्रदेश के लगभग हर जिले में युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के दौरान गंभीर अनियमितताएं और मनमानी सामने आईं।

जिला स्तरीय समितियों ने शिक्षकों की आपत्तियों की सुनवाई किए बिना उन्हें अतिशेष घोषित कर दिया।

रातोंरात अतिशेष शिक्षकों की सूची जारी कर, अगली सुबह काउंसलिंग के लिए बुला लिया गया, जिससे शिक्षकों को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला।

इसके विरोध में प्रदेश भर के शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कीं।

🧑‍⚖️ कोर्ट में क्या हुआ?

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया—

शिक्षा विभाग द्वारा बनाई गई युक्तियुक्तकरण नीति नियमविरुद्ध है।

शिक्षकों को न तो दावा-आपत्ति का अवसर मिला और न ही प्रक्रिया प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप थी।

अधिकारियों ने मनमाने तरीके से नियम बनाए और शिक्षकों को जबरन नई जगह पदस्थ कर दिया।

वकीलों ने कोर्ट से मांग की कि युक्तियुक्तकरण नीति को ही खारिज कर दिया जाए।

📌 क्या कहा कोर्ट ने?

कोर्ट ने युक्तियुक्तकरण नीति की वैधता पर अंतिम निर्णय सुरक्षित रखते हुए फिलहाल शिक्षकों को राहत दी है।

जिला स्तरीय समिति को 16 जून तक फैसला लेने के आदेश दिए गए हैं, ताकि शिक्षकों को न्याय मिल सके।

 

📢 क्या आगे होगा?

यदि समिति 16 जून तक शिक्षकों की आपत्तियों पर निर्णय नहीं लेती, तो मामला फिर से हाईकोर्ट में आएगा, और नीति की वैधता पर अंतिम फैसला दिया जाएगा।