जनजातीय कला से सजे सपनों के आशियाने ने भरा सहोद्रा बाई के जीवन में रंग प्रधानमंत्री आवास योजना ने बदली जांजगीर-चांपा की सहोद्रा बाई की जिंदगी, घर बना जनजातीय संस्कृति की मिसाल

रायपुर, 19 जून 2025। जांजगीर-चांपा जिले की ग्राम पंचायत पुछेली खपरीडीह की सहोद्रा बाई धनुवार के जीवन में उस समय नई उमंगों ने दस्तक दी, जब उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पक्के घर की चाबी मिली। यह चाबी सिर्फ एक मकान की नहीं थी, बल्कि उनके आत्मसम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की शुरुआत का प्रतीक बन गई।

धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष अभियान के दौरान सहोद्रा बाई को जैसे ही मंच से उनके घर की चाबी सौंपी गई, उनका चेहरा खुशी से खिल उठा। चाबी मिलते ही उन्होंने मुस्कराते हुए कहा – “चाबी तो दे दी आपने, लेकिन ताला नहीं दिया।” उनकी यह सहज और मासूम प्रतिक्रिया पूरे माहौल को भावुकता और उल्लास से भर गई। यह क्षण न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे गांव के लिए गर्व का विषय बन गया।

पति के निधन के बाद अकेले जीवन जी रहीं सहोद्रा बाई को प्रधानमंत्री आवास योजना के साथ ही उज्ज्वला योजना, महतारी वंदन, पेंशन योजना और मनरेगा के तहत 90 दिनों की मजदूरी जैसी योजनाओं का भी लाभ मिला है। इन योजनाओं के सहयोग से उनका वृद्धावस्था जीवन अब सशक्त, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर बन चुका है।

जनजातीय कला बनी चर्चा का विषय
सिर्फ घर ही नहीं, सहोद्रा बाई ने अपने नए आशियाने को छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति की जीवंत मिसाल बना दिया है। घर की दीवारों पर जनजातीय वाद्य यंत्रों, पारंपरिक नृत्य और चित्रकलाओं से सजावट कर उन्होंने इसे एक कलात्मक पहचान दी है। उनका यह नवाचार पूरे जनपद पंचायत में प्रेरणा बन गया है।

इसके साथ ही उन्होंने पर्यावरण के प्रति अपनी जागरूकता दिखाते हुए घर के सामने अपनी माँ के नाम पर आम का पौधा लगाया है और जल संरक्षण के लिए सोखता गड्ढा भी तैयार करवाया है।

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति आभार प्रकट करते हुए सहोद्रा बाई कहती हैं कि अब उनका घर केवल दीवारों से बना ढांचा नहीं, बल्कि सपनों, संस्कृति और आत्मसम्मान की मजबूत नींव पर टिका एक “जीवंत घर” बन चुका है।