भारत को 2026-27 तक मिलेंगे शेष S-400 मिसाइल सिस्टम: रूस का आश्वासन

नई दिल्ली/, 27 जून 2025 – भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग एक बार फिर मजबूत होता दिखाई दे रहा है। रूस ने भारत को भरोसा दिलाया है कि वह अत्याधुनिक S-400 ट्रायम्फ वायु रक्षा प्रणाली की शेष दो स्क्वाड्रनों की डिलीवरी वर्ष 2026-27 तक पूरी कर देगा। यह आश्वासन चीन के किंगदाओ में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान दिया गया।

बैठक में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रूस के नवनियुक्त रक्षा मंत्री आंद्रे बेलौसोव के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसमें लंबित डिलीवरी पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा, “भारत-रूस रक्षा सहयोग को और मजबूत करने को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई।”

🔺 S-400 प्रणाली: भारत की वायु सुरक्षा का सुदर्शन चक्र

S-400 ट्रायम्फ को भारत में ‘सुदर्शन चक्र’ के नाम से जाना जाता है। यह प्रणाली 400 किलोमीटर तक की दूरी से आने वाले खतरे को भांपकर उसे निष्क्रिय कर सकती है। इसमें लड़ाकू विमान, क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों से लेकर ड्रोन तक को मार गिराने की क्षमता है।

प्रत्येक स्क्वाड्रन में: 2 मिसाइल बैटरियां होती हैं

कुल मिसाइलें: लगभग 128

मारक क्षमता: 120 से 400 किमी तक

तकनीकी विशेषताएं: लंबी दूरी के रडार, ऑल-टेरेन ट्रांसपोर्टर-एरेक्टर-लॉन्चर (TEL) और मल्टी-रेंज इंटरसेप्टर्स

 

⚔️ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में S-400 की भूमिका

बीते महीने पाकिस्तान से लगी सीमा पर भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में S-400 ने प्रमुख भूमिका निभाई। पाकिस्तान ने 7 से 10 मई के बीच दावा किया था कि उसने पंजाब स्थित आदमपुर एयरबेस में तैनात S-400 प्रणाली को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया है।

लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 मई को आदमपुर एयरबेस का दौरा कर S-400 की सक्रियता को दर्शाते हुए पाकिस्तान के दावे को खारिज कर दिया। उन्होंने S-400 के लॉन्चर के साथ एक तस्वीर भी साझा की, जिससे स्पष्ट हुआ कि प्रणाली पूर्णतः कार्यशील है।

🤝 भारत-रूस रक्षा सौदा: पृष्ठभूमि

भारत और रूस के बीच 2018 में हुए 5.43 अरब डॉलर (लगभग ₹40,000 करोड़) के सौदे के तहत भारत को पांच S-400 स्क्वाड्रन मिलने थे। इस प्रणाली की डिलीवरी 2023 के अंत तक पूरी होनी थी, लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते इसमें देरी हुई है।

अब तक तीन स्क्वाड्रनों की तैनाती पूरी हो चुकी है:

एक स्क्वाड्रन उत्तर-पश्चिमी सीमा पर तैनात है

दूसरी पूर्वोत्तर भारत में तैनात की गई है

तीसरी की तैनाती को गोपनीय रखा गया है

शेष दो स्क्वाड्रनों की डिलीवरी 2026-27 तक पूरी करने का भरोसा अब रूस ने दिया है।