पढ़िए विस्तार से… आखिर क्या है ? भारतमाला परियोजना ,, घोटाले में निलंबित पटवारी सुरेश मिश्रा ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में लगाए गंभीर आरोप

बिलासपुर, 28 जून 2025 छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में बहुचर्चित भारतमाला परियोजना फर्जीवाड़े में निलंबित पटवारी सुरेश मिश्रा (62) ने शुक्रवार को आत्महत्या कर ली। उनका शव सकरी थाना क्षेत्र के जोकी गांव स्थित बहन के फार्महाउस में फंदे से लटका मिला। वह 30 जून को सेवानिवृत्त होने वाले थे।

निलंबन के बाद तनाव में थे सुरेश मिश्रा

मिली जानकारी के अनुसार सुरेश मिश्रा को हाल ही में भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण में फर्जी दस्तावेज तैयार करने के मामले में दोषी पाए जाने पर निलंबित किया गया था। इस कार्रवाई के बाद से वे मानसिक तनाव में चल रहे थे। आत्महत्या से पहले उन्होंने दो सुसाइड नोट लिखे हैं, जिनमें उन्होंने RI, कोटवार और एक अन्य व्यक्ति को आत्महत्या के लिए जिम्मेदार बताया है।

आत्महत्या की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर

सकरी थाना प्रभारी प्रदीप आर्या के अनुसार, शुक्रवार दोपहर लगभग 1 बजे सुरेश मिश्रा ने फांसी लगाई। उनका कमरा अंदर से बंद था और शव पंखे से रस्सी के सहारे लटका हुआ मिला। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए मर्च्युरी भेजा है।

सुसाइड नोट में खुद को बताया निर्दोष

पुलिस को मौके से बरामद दो सुसाइड नोट मिले हैं। इनमें सुरेश मिश्रा ने खुद को निर्दोष बताया और कहा कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है। उन्होंने अपने निलंबन को अनुचित ठहराते हुए बहाली की मांग भी नोट में दर्ज की है।

SP बोले– सुसाइड नोट की जांच के बाद होगी कार्रवाई

बिलासपुर एसपी रजनेश सिंह ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा, “सुसाइड नोट को जब्त कर जांच की जा रही है। उसमें जिन लोगों के नाम लिखे गए हैं, उनकी भूमिका की गहराई से जांच की जाएगी। अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।”

क्या है पूरा मामला?

भारतमाला परियोजना के तहत बिलासपुर-उरगा राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ था। ढेका गांव में अधिग्रहित जमीन के मुआवजा प्रकरण में फर्जी कागजात बनाकर करोड़ों रुपये का मुआवजा स्वीकृत कराया गया।

जांच में सामने आया कि तत्कालीन तहसीलदार डीएस उइके और पटवारी सुरेश मिश्रा ने राजस्व दस्तावेजों में कूटरचना की और कुछ व्यक्तियों के नाम अवैध रूप से दर्ज कराए। इस आधार पर मुआवजे की प्रक्रिया आगे बढ़ी, जिससे शासन को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ।

जिला स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के बाद 25 जून को सुरेश मिश्रा और डीएस उइके के खिलाफ तोरवा थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी।