छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में तेंदूपत्ता संग्राहकों के बोनस में बड़ा घोटाला सामने आया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने इस मामले में 4500 पन्नों की चार्जशीट पेश की है, जिसमें अफसरों और लघु वनोपज सहकारी समितियों के पदाधिकारियों द्वारा करीब 3 करोड़ 92 लाख रुपए के गबन की पुष्टि की गई है।
कैसे हुआ घोटाला?
सरकार ने तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस सीधे कैश में देने का नियम लागू किया था। लेकिन इस नियम का फायदा उठाकर तत्कालीन DFO अशोक कुमार पटेल समेत वन विभाग के अधिकारियों और समिति प्रबंधकों ने संग्राहकों के नाम पर रकम निकालकर आपस में बांट ली।
EOW की जांच में खुलासा हुआ है कि इस गबन की रकम सुकमा के पत्रकारों से लेकर कुछ राजनेताओं तक भी पहुंची।
किसे-कितना पैसा मिला?
लाभार्थी राशि (₹)
तत्कालीन DFO अशोक पटेल 91 लाख 90 हजार
राजनेता 7.5 लाख
पत्रकार 5.9 लाख
समिति प्रबंधकों का निजी खर्च 2 करोड़ 82 लाख
8 समितियों में 3.92 करोड़ की हेराफेरी
EOW की जांच में पता चला कि वर्ष 2021 और 2022 में सुकमा जिले में तेंदूपत्ता बोनस वितरण में करीब 7 करोड़ की अनियमितता हुई है। अब तक की जांच में 8 समितियों में 3 करोड़ 92 लाख रुपए से ज्यादा के गबन की पुष्टि हो चुकी है।
कैसे खुला मामला?
EOW को एक मुखबिर से सूचना मिली थी कि सुकमा जिले में बोनस राशि में गड़बड़ी की जा रही है। इसके बाद गोपनीय जांच की गई।
27 जून को अधिकारियों ने दबिश दी और कई अफसरों और समिति पदाधिकारियों को हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपियों ने गबन की गई राशि के खर्च की जानकारी दी।
कितने लोग गिरफ्तार?
तत्कालीन DFO अशोक कुमार पटेल
वन विभाग के 4 कर्मचारी
7 प्राथमिक वनोपज समिति प्रबंधक
कुल 12 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
कुछ आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
क्या कहा EOW ने?
EOW के मुताबिक, DFO अशोक कुमार पटेल ने पद का दुरुपयोग करते हुए वनकर्मियों और समिति प्रबंधकों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची। तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिलने वाली बोनस राशि को निजी उपयोग में खर्च कर दिया।
