अंधविश्वास की बलि चढ़ा मासूम: बलरामपुर में मानसिक रूप से बीमार बेटे के इलाज के लिए 3 साल के बच्चे की गला काटकर हत्या

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। अपने मानसिक रूप से बीमार बेटे के इलाज के लिए एक पिता ने तांत्रिक के कहने पर अंधविश्वास में पड़कर गांव के 3 साल के मासूम की गला रेतकर बलि दे दी।

यह घटना सामरी थाना क्षेत्र के सुलुगडीह गांव की है। आरोपी राजू कोरवा (40) ने मिठाई और बिस्किट का लालच देकर मासूम अजय नगेशिया को अपने घर ले जाकर उसकी गला रेतकर हत्या कर दी।

सवा साल से गुमशुदा था बच्चा, नाले से कंकाल मिला
1 अप्रैल 2024 को 3 वर्षीय अजय नगेशिया अचानक इलबासा जंगल से लापता हो गया था। परिजनों ने 6 अप्रैल को सामरी थाना में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस लगातार तलाश में जुटी थी। अब सवा साल बाद आरोपी के कबूलनामे से घटना का खुलासा हुआ।

तंत्र साधना के लिए सिर रखा, धड़ को जलाया
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसका 12 साल का बेटा मिर्गी और मानसिक बीमारी से ग्रसित है। किसी ने उसे कहा था कि बच्चे की बलि देने से बीमारी दूर हो जाएगी। इसी अंधविश्वास के चलते उसने मासूम की हत्या की।

राजू कोरवा ने मासूम का सिर काटकर अपने घर में तीन दिन तक तांत्रिक पूजा की। सिर को कपड़े से ढंककर छुपा रखा। इसके बाद सिर को जमीन में दफना दिया। धड़ को नाले के पास बोरी में भरकर ले गया और वहां जलाकर सबूत मिटाने की कोशिश की।

एसडीएम की अनुमति से कंकाल बरामद
आरोपी की निशानदेही पर एसडीएम कुसमी की अनुमति के बाद नाले के पास खुदाई कराई गई। वहां से बच्चे का कंकाल मिला। हत्या में प्रयुक्त लोहे की छुरी भी बरामद की गई है। बच्चे के सिर की हड्डी डीएनए जांच के लिए भेजी गई है।

गांव में कर रहा था ‘महापूजा’ की बात, तभी हुआ शक
बलरामपुर एसपी वैभव बैंकर ने बताया कि आरोपी राजू कोरवा गांव में ‘बड़ी पूजा’ की चर्चा कर रहा था। इसी पर शक होने पर पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। पहले आरोपी ने बात को टालने की कोशिश की, लेकिन सख्ती से पूछताछ में उसने सच्चाई उगल दी।

जेल भेजा गया आरोपी
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 363 (अपहरण), 302 (हत्या), और 201 (सबूत मिटाना) के तहत मामला दर्ज कर कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने उसे जेल भेज दिया है।