छत्तीसगढ़ में भूमि अधिग्रहण प्राधिकरण गठन का आदेश, सुप्रीम कोर्ट ने दी दो महीने की डेडलाइन

छत्तीसगढ़ में भूमि अधिग्रहण से जुड़े विवादों और मुआवजा मामलों के निपटारे के लिए अब सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को भूमि अधिग्रहण पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण का गठन करने का स्पष्ट आदेश दिया है। अदालत ने इसके लिए दो महीने की समय-सीमा तय की है, साथ ही चेतावनी दी है कि यदि तय समय में प्राधिकरण का गठन नहीं हुआ तो कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य सचिव को दिए निर्देश

यह आदेश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की डिवीजन बेंच ने दिया। आदेश में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को सीधे निर्देशित किया गया है कि वे दो महीने के भीतर प्राधिकरण का गठन सुनिश्चित करें और इसकी प्रक्रिया की जानकारी अदालत में प्रस्तुत करें।
मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2025 को तय की गई है।

सारंगढ़-बिलाईगढ़ के बाबूलाल की याचिका पर सुनवाई

इस पूरे मामले की शुरुआत सारंगढ़-बिलाईगढ़ निवासी बाबूलाल की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका से हुई।
याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट अभिनव श्रीवास्तव ने सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में 2018 से अब तक भूमि अधिग्रहण प्राधिकरण का गठन नहीं किया गया है।

इससे जुड़े मुआवजा, ब्याज और पुनर्वास से संबंधित सैकड़ों आवेदन अधर में लटके हैं, जिससे किसानों और जमीन मालिकों को गंभीर परेशानी हो रही है।

2018 के एक्ट के बाद भी प्राधिकरण निष्क्रिय

एडवोकेट अभिनव श्रीवास्तव ने बताया कि 2018 में लागू हुए नए भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत अनुच्छेद-5(a) में यह प्रावधान है कि भूमि अधिग्रहण अधिकारी को मुआवजा और अन्य विवादों का निपटारा एक साल के भीतर करना अनिवार्य है।
यदि ऐसा नहीं होता है, तो प्रभावित व्यक्ति सीधे भूमि अधिग्रहण प्राधिकरण के पास आवेदन कर सकता है।

लेकिन छत्तीसगढ़ में यह प्राधिकरण आज तक अस्तित्व में नहीं आ सका है।
सरकार ने 28 अप्रैल 2025 को प्राधिकरण गठन की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि वह केवल कागजों तक सीमित है।

याचिकाकर्ता का हक सुरक्षित रहेगा – सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस आदेश के बावजूद याचिकाकर्ता सहित सभी प्रभावित व्यक्तियों के मुआवजा और ब्याज के अधिकार सुरक्षित रहेंगे। उन्हें उनके दावे से वंचित नहीं किया जाएगा।

हाईकोर्ट में भी दी थी याचिका, वहां खारिज हुई

इससे पहले बाबूलाल ने इस मामले को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।
हालांकि हाईकोर्ट ने इसे जनहित का मामला मानने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी थी।

अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रभावित किसानों और भूमि स्वामियों को राहत की उम्मीद जगी है।