बिलासपुर, 18 अगस्त 2025। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण जानकारी दी कि जिला अस्पताल कबीरधाम में कार्यरत संविदा स्टाफ नर्स को मातृत्व अवकाश अवधि का पूरा वेतन भुगतान कर दिया गया है।
यह फैसला प्रदेश की हजारों महिला संविदा कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत और जीत के रूप में देखा जा रहा है।
मामला क्या था?
जानकारी के अनुसार, याचिकाकर्ता स्टाफ नर्स ने 16 जनवरी 2024 से 16 जुलाई 2024 तक मातृत्व अवकाश लिया था। इस दौरान उन्होंने 21 जनवरी को कन्या संतान को जन्म दिया और 14 जुलाई को पुनः कार्यभार ग्रहण किया।
हालांकि, शासन द्वारा इस अवधि का वेतन रोका गया, जबकि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 2010 में मातृत्व अवकाश वेतन का स्पष्ट प्रावधान है। इसी को लेकर उन्होंने रिट याचिका और बाद में अवमानना याचिका दायर की थी।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने पहले ही शासन से कड़े शब्दों में पूछा था कि आदेश के बावजूद मातृत्व अवकाश का वेतन क्यों नहीं दिया गया।
न्यायालय ने यह भी कहा था कि “यह केवल आर्थिक अधिकार का मामला नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और गरिमा से जुड़ा हुआ है।”
याचिका का निष्कर्ष
आज की सुनवाई में शासन की ओर से बताया गया कि याचिकाकर्ता को अब पूरा वेतन दे दिया गया है। इसके साथ ही अवमानना याचिका का निष्कर्ष निकल आया।
अधिवक्ता का बयान
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता श्रीकांत कौशिक ने कहा, “यह केवल एक महिला स्टाफ नर्स की जीत नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश की उन महिला संविदा कर्मियों की जीत है, जिन्हें वर्षों से मातृत्व अवकाश वेतन को लेकर संघर्ष करना पड़ रहा था। न्यायालय ने साफ कर दिया है कि मातृत्व अवकाश महिला कर्मचारियों का वैधानिक अधिकार है, चाहे उनकी नियुक्ति नियमित हो या संविदा।”
