छत्तीसगढ़ शराब घोटाला केस: पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री और मौजूदा विधायक कवासी लखमा की जमानत याचिका पर शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस अरविंद वर्मा की सिंगल बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।

लखमा की ओर से एडवोकेट हर्षवर्धन परगनिहा ने दलील दी कि वर्ष 2024 में दर्ज इस केस में डेढ़ साल बाद उनकी गिरफ्तारी की गई है, जो गलत है। उन्होंने कहा कि पूर्व मंत्री के खिलाफ किसी भी तरह के ठोस सबूत नहीं हैं, केवल बयानों के आधार पर उन्हें आरोपी बनाया गया है। बचाव पक्ष ने इसे राजनीतिक षडयंत्र बताया।

वहीं, ईओडब्ल्यू की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने कोर्ट को बताया कि चार्जशीट के मुताबिक लखमा के बंगले में हर महीने 2 करोड़ रुपये कमीशन पहुंचता था। जांच में सामने आया कि शराब सिंडिकेट एक संगठित तंत्र की तरह काम करता था, जिसमें अफसर से लेकर मंत्री तक कमीशन लेते थे।

ईडी और ईओडब्ल्यू की जांच में लखमा की भूमिका अहम बताई गई है। ईडी का आरोप है कि लखमा सिंडिकेट का मुख्य हिस्सा थे और उनके निर्देश पर ही शराब सिंडिकेट संचालित होता था। जांच में यह भी सामने आया कि शराब नीति बदलने और FL-10 लाइसेंस की शुरुआत में लखमा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ईडी के वकील सौरभ पांडेय ने कोर्ट में दावा किया कि शराब घोटाले से छत्तीसगढ़ सरकार के खजाने को भारी नुकसान हुआ है। वर्ष 2019 से 2022 तक चले इस घोटाले में 2,161 करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई। इसमें से केवल लखमा को ही हर महीने 2 करोड़ रुपये यानी करीब 72 करोड़ रुपये मिले। आरोप है कि इस रकम का इस्तेमाल उनके बेटे के घर और सुकमा कांग्रेस भवन के निर्माण में हुआ।

इस मामले में ईडी ने लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा ईओडब्ल्यू ने भी केस दर्ज कर चार्जशीट पेश की और लखमा को गिरफ्तार किया था। अब हाईकोर्ट लखमा की जमानत याचिका पर जल्द फैसला सुनाएगा।