बड़ी खबर : अमेरिकी ट्रेडिंग फर्म जेन स्ट्रीट ने SEBI के खिलाफ दायर की अपील

नई दिल्ली – अमेरिकी ट्रेडिंग कंपनी जेन स्ट्रीट ग्रुप और भारतीय बाजार नियामक (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) के बीच टकराव तेज हो गया है।

SEBI ने जेन स्ट्रीट पर बाजार में हेरफेर करने और 4,844 करोड़ रुपए का अवैध मुनाफा कमाने का आरोप लगाते हुए कंपनी को शेयर बाजार से बैन कर दिया था। अब कंपनी ने इस फैसले को चुनौती देते हुए सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) का दरवाजा खटखटाया है।

मामला क्या है? (4 पॉइंट्स में समझें)

1️⃣ SEBI का आरोप –

जेन स्ट्रीट ने जनवरी 2023 से मई 2025 तक निफ्टी और बैंक निफ्टी में हेरफेर किया। इस दौरान कंपनी ने 36,671 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया, जिसमें से 4,844 करोड़ रुपए को गैर-कानूनी माना गया।

2️⃣ SEBI की सख्ती –

3 जुलाई 2025 को सेबी ने जेन स्ट्रीट पर रोक लगाई। शर्त रखी कि वह 4,844 करोड़ रुपए एस्क्रो अकाउंट में जमा करे। जेन स्ट्रीट ने 11 जुलाई को यह रकम जमा कर दी। इसके बाद 18 जुलाई को उसे दोबारा ट्रेडिंग की इजाजत मिली।

3️⃣ कंपनी का बचाव –

जेन स्ट्रीट का कहना है कि उसने इंडेक्स आर्बिट्रेज स्ट्रैटेजी का इस्तेमाल किया, जो पूरी तरह से वैध है। कंपनी का आरोप है कि सेबी ने उसकी ट्रेडिंग को गलत समझा है।

4️⃣ अब नया मोड़ –

जेन स्ट्रीट ने अब सेबी के फैसले को SAT में चुनौती दी है। अपील पर जल्द सुनवाई होने की उम्मीद है।

आर्बिट्रेज बनाम मैनिपुलेशन1

आर्बिट्रेज (वैध) – अलग-अलग एक्सचेंज पर एक ही शेयर की कीमतों का फर्क पकड़कर मुनाफा कमाना।

मैनिपुलेशन (गैर-कानूनी) – झूठी खबरें फैलाकर या ट्रेडिंग पैटर्न बदलकर कीमतों को प्रभावित करना।

सेबी की अगली कार्रवाई

NSE और BSE को कहा गया है कि जेन स्ट्रीट के ट्रेड्स पर कड़ी निगरानी रखें।

सेबी ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए अब सेंसेक्स ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स की भी जांच शुरू कर दी है।

अगर जेन स्ट्रीट दोबारा संदिग्ध पैटर्न अपनाती है तो कंपनी पर कड़ी कार्रवाई होगी।