कसडोल शिक्षा कार्यालय में हेमलाल कैवर्त्य की भूमिका पर उठे सवाल,, सूत्रों के मुताबिक युक्तियुक्तकरण में भी…आखिर कौन है जो शिक्षा विभाग के कार्यालय में रहता है…शिक्षकों के आवेदन में आई बात , D.E.O बोले– “मुझे जानकारी नहीं है मै पता करवाता हु…”

योगेश यादव/ बलौदाबाजार । विकासखण्ड कसडोल के शिक्षकों ने शिक्षा विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। महीनों से दिए जा रहे मांग पत्रों का समाधान न होने से नाराज़ शिक्षकों ने अब खुलकर सवाल उठाना शुरू कर दिया है।

शिक्षकों ने कहा कि शिक्षा कार्यालय में कार्यरत हेमलाल कैवर्त्य की भूमिका संदिग्ध है। यह स्पष्ट नहीं है कि वे संविदा कर्मचारी हैं या रेगुलर, लेकिन वर्षों से कार्यालय का कामकाज देख रहे हैं। आरोप यह भी है कि युक्तियुक्तकरण जैसे मामलों में हेमलाल की लापरवाही सामने आई, जिसकी कीमत विभाग आज तक चुका रहा है।

शिक्षकों की प्रमुख समस्याएँ

01. आयकर विवरणी का 2025 का फार्म नं. 16 शिक्षकों को अप्राप्त है

02. शिक्षकों का अर्जित अवकाश एवं वार्षिक वेतन वृद्धि सेवा पुस्तिका में संधारित किया जावे।

03. विकासखण्ड के सभी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, हाई स्कूल एवं हायर सेकण्डरी का वरिष्ठ धारक के नाम शाला प्रभार का आदेश जारी करना

04. युक्तियुक्तकरण की विसंगति की चर्चा का समय देना।

05. युक्तियुक्तकरण के समायोजित शाला के संस्था प्रमुख की बैठक आहूत कर शाला संचालन का मार्ग दर्शन करे।

06. वर्ष 2013,2014 एवं 2016 का टी.डी.एस. तत्काल पूरा कर सेवानिवृत्त शिक्षको को हो रहे आर्थिक बोझ को रोका जाये।

07.शिक्षक एल.बी.संवर्ग का समयमान वेतन अविलंब जमा किया जावे।

08. उच्च शिक्षा की परीक्षा अनुमति आदेश जारी किया जावे।

09. सेवा पुस्तिका का विभागीय सत्यापन करवाया जावे।

10. मध्यान्ह भोजन रसोईया एवं समुह अध्यक्ष की संकुल स्तरीय बैठके लेकर सुझाव देना। चुकि माननीय मुख्य सचिव छ.ग. शासन का शपथ पत्र के अनुसार कार्य संपादित है।

11. श्री हेमलाल कैवर्त्य जो शासकीय सेवक न होकर कार्यालयीन कार्य देख रहे है उसे कार्यालय मुक्त किया जाई।

हेमलाल कैवर्त्य के मामले में जब जिला शिक्षा अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कहा— “मुझे जानकारी नहीं है, मैं पता करवाता हूँ।”

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिरकार शिक्षा विभाग में ऐसे व्यक्ति को क्यों रखा गया है जो शिक्षा विभाग के कई मामलों में हेर फेर करते हैं युक्तिकरण में भी इन्होंने ही की जिसका भुगतान आज भी भुगत रहा है।