एशिया कप 2025 का फाइनल भारत और पाकिस्तान के बीच ऐतिहासिक मुकाबले के रूप में दर्ज हो गया, जिसमें भारत ने पाकिस्तान को 5 विकेट से हराकर 9वीं बार खिताब अपने नाम किया। एशिया कप के 41 साल के इतिहास में यह पहली बार था जब भारत और पाकिस्तान की टीमें फाइनल में आमने-सामने हुई थीं।
पहले गेंदबाजों का जलवा, फिर तिलक ने दिलाया जीत का तिलक
पाकिस्तान द्वारा दिए गए 147 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की शुरुआत बेहद खराब रही। मात्र 20 रन के स्कोर पर अभिषेक (5), गिल (12) और सूर्यकुमार यादव (1) के विकेट गिर गए थे। लेकिन इसके बाद तिलक वर्मा ने मोर्चा संभालते हुए शानदार 69 रन की नाबाद पारी खेली।
उन्होंने पहले संजू सैमसन (24) के साथ अर्धशतकीय साझेदारी की, फिर शिवम दुबे (33) के साथ 60 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर भारत को संकट से बाहर निकाला। तिलक की यह संयमित और प्रभावशाली पारी भारत की जीत की नींव बनी।
पाकिस्तानी गेंदबाजों की दरियादिली – रऊफ बने हार के जिम्मेदार
पाकिस्तान की ओर से फहीम अशरफ ने 3 विकेट झटके, लेकिन हारिस रऊफ की गेंदबाजी पाकिस्तान के लिए भारी पड़ी। उन्होंने 3.4 ओवर में 50 रन लुटाए और एक भी विकेट नहीं ले सके। उनके दो महंगे ओवर – 15वां (17 रन) और 18वां (13 रन) – भारत के लिए निर्णायक साबित हुए।
जैसे ही पाकिस्तान मैच में पकड़ बनाता, रऊफ ने बड़े ओवर देकर दबाव हटा दिया।
पाकिस्तान की शुरुआत दमदार, अंत बेहद शर्मनाक
टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए पाकिस्तान की शुरुआत अच्छी रही। साहिबजादा फरहान (50) और फखर जमान ने पहले विकेट के लिए 84 रन की साझेदारी की। लेकिन इसके बाद पाकिस्तान की बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई।
113 रन पर दूसरा विकेट गिरने के बाद पाकिस्तानी टीम 33 रन के भीतर अपने 9 विकेट गंवाकर 146 रन पर ऑलआउट हो गई।
भारतीय स्पिनर्स – कुलदीप यादव, अक्षर पटेल और वरुण चक्रवर्ती ने शानदार गेंदबाजी करते हुए पाकिस्तान के मध्यक्रम और निचले क्रम को तहस-नहस कर दिया।
टॉस के समय अजीब स्थिति, आगा की हुई बेइज्जती?
मैच से पहले टॉस के समय एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। भारतीय कमेंटेटर रवि शास्त्री और पाकिस्तानी पूर्व तेज गेंदबाज वकार यूनिस दोनों मंच पर मौजूद थे। लेकिन रवि शास्त्री ने पाकिस्तानी कप्तान सलमान आगा से कोई सवाल नहीं पूछा, जिससे यह चर्चा शुरू हो गई कि यह एक तरह से ‘बेइज्जती’ थी।
यह पहली बार हुआ कि दो प्रजेंटर टॉस के वक्त मौजूद रहे, और उन्होंने अलग-अलग टीमों से संवाद किया। सोशल मीडिया पर इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह क्रिकेट की निष्पक्षता पर सवालिया निशान है।
