रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच में अब कांग्रेस संगठन भी जांच एजेंसियों के राडार पर आ गया है। ACB-EOW ने कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू को नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में पार्टी कार्यालय के अकाउंटेंट देवेंद्र डड़सेना से जुड़ी जानकारी मांगी गई है।
क्या पूछा गया नोटिस में?
एजेंसी ने गैदू से पूछा है कि देवेंद्र डड़सेना पार्टी कार्यालय से किस जिम्मेदारी में जुड़े थे, उनकी नियुक्ति किसने की, उन्हें कितना वेतन मिलता था और उनकी नियुक्ति से लेकर कार्यकाल तक का पूरा ब्योरा मांगा गया है। देवेंद्र कोषाध्यक्ष रामगोपाल के करीबी बताए जाते हैं।
गैदू का आरोप : राजनीतिक दबाव में कार्रवाई
नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए गैदू ने कहा – “यह देश की पहली घटना होगी, जब किसी राजनीतिक दल को जांच एजेंसी प्रताड़ित कर रही है। राजनीतिक दबाव में कार्रवाई हो रही है। इससे पहले भी मुझे ED ने तीन बार नोटिस दिया। हर बार मैंने लिखित जवाब दिया, लेकिन जवाब देने के दौरान मुझे 9-9 घंटे दफ्तर में बैठाकर रखा गया। यह साबित करता है कि भाजपा केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है।”
गैदू ने बताया कि ED ने उनसे सुकमा कांग्रेस भवन से जुड़ी जानकारी मांगी थी। उन्होंने भवन निर्माण से जुड़े सभी दस्तावेज एजेंसी को सौंप दिए थे, इसके बावजूद घंटों पूछताछ की गई।
ED की कार्रवाई और कांग्रेस भवन अटैचमेंट
28 दिसंबर 2024 को ED ने पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, उनके बेटे हरीश कवासी और करीबी सुशील ओझा के ठिकानों पर छापा मारा था। जांच में सामने आया कि शराब घोटाले की कमाई का उपयोग सुकमा कांग्रेस भवन और लखमा परिवार की संपत्तियों के निर्माण में किया गया।
ED का दावा है कि शराब सिंडिकेट से कवासी लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपए की रिश्वत मिलती थी। 36 महीनों में यह रकम 72 करोड़ तक पहुंची। इसमें से 68 लाख रुपए से सुकमा कांग्रेस भवन का निर्माण किया गया। इसी आधार पर कांग्रेस भवन को भी अटैच कर लिया गया है।
क्या है अटैचमेंट?
किसी संपत्ति का अटैचमेंट का मतलब है कि संपत्ति का उपयोग तो किया जा सकता है, लेकिन उसे बेचा या ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। यह कानूनी प्रक्रिया है, ताकि विवादित या भ्रष्टाचार से जुड़ी संपत्ति को सुरक्षित रखा जा सके।
2 हजार करोड़ से अधिक का घोटाला
ED की FIR के मुताबिक, शराब घोटाले में 2 हजार करोड़ रुपए से अधिक का भ्रष्टाचार हुआ है। इसमें IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के MD एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर पर सिंडिकेट चलाने का आरोप है।
कवासी लखमा इस सिंडिकेट के अहम हिस्सेदार बताए गए हैं। वे 16 जनवरी 2025 से जेल में बंद हैं। एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने शराब नीति बदलने और FL-10 लाइसेंस लागू करने में बड़ी भूमिका निभाई। इसी नीति से शराब सिंडिकेट को फायदा पहुंचा और 3200 करोड़ रुपए से ज्यादा की अवैध कमाई हुई।
