उपशास्त्रीय संगीत जगत को बड़ा झटका देते हुए पद्मविभूषण से अलंकृत विख्यात गायक पं. छन्नूलाल मिश्र का निधन हो गया। गुरुवार तड़के मिर्जापुर में उन्होंने अंतिम सांस ली। वह 93 वर्ष के थे। उनके निधन से संगीत जगत में शोक की लहर है।
परिजनों के अनुसार बुधवार देर रात उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। उन्हें आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, जहां भोर में करीब साढ़े चार बजे चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनका पार्थिव शरीर वाराणसी लाया जा रहा है, जहां काशी में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
पुत्र भी बनारस के लिए रवाना
पं. मिश्र के एकमात्र पुत्र तबला वादक पं. रामकुमार मिश्र दिल्ली से सड़क मार्ग से वाराणसी के लिए रवाना हो चुके हैं। उनके शाम तक पहुँचने की संभावना है।
आजमगढ़ से काशी तक की यात्रा
आजमगढ़ में जन्मे पं. छन्नूलाल मिश्र बनारस घराना और किराना घराना की गायकी के प्रमुख प्रतिनिधि रहे। उन्होंने उपशास्त्रीय गायन को नई पहचान दी और लोक संगीत को भी मंचों पर सम्मान दिलाया।
संगीत में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें वर्ष 2000 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2010 में पद्मभूषण और 2020 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में वे वाराणसी सीट से भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक भी रहे।
तीन साल से रह रहे थे मिर्जापुर में
पिछले तीन वर्षों से पं. मिश्र अपनी छोटी पुत्री डॉ. नम्रता मिश्र के साथ मिर्जापुर के महंत शिवाला स्थित आवास पर रह रहे थे। वहीं पर उन्होंने अंतिम सांस ली।
