रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को आज आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने रायपुर की स्पेशल कोर्ट में पेश किया। 24 सितंबर को कोर्ट के आदेश पर उन्हें रिमांड पर लिया गया था, जिसकी अवधि 6 अक्टूबर को पूरी हो गई है।
EOW अधिकारियों ने दावा किया है कि पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां मिली हैं, जिनके आधार पर आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ाया जाएगा। एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही कुछ और प्रभावशाली व्यक्तियों पर कार्रवाई हो सकती है।
गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चैतन्य बघेल को 18 जुलाई 2025 को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया था। तब से वे जेल में हैं।
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शराब घोटाले से जुड़ा बड़ा नेटवर्क
ED की जांच में सामने आया है कि शराब घोटाले से मिली अवैध रकम में से 16.70 करोड़ रुपए चैतन्य बघेल तक पहुंचे थे।
एजेंसी का दावा है कि इस धन को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के जरिए वैध दिखाने का प्रयास किया गया।
जांच में सामने आया कि बघेल की कंपनी विठ्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट (बघेल डेवलपर्स) में शराब घोटाले की धनराशि का निवेश किया गया था।
ED की छापेमारी में कंपनी के अकाउंटेंट्स और कंसल्टेंट्स से कई फर्जी वित्तीय दस्तावेज मिले।
प्रोजेक्ट के कंसल्टेंट राजेन्द्र जैन के अनुसार, वास्तविक खर्च 13 से 15 करोड़ था, लेकिन दस्तावेजों में 7.14 करोड़ रुपए दर्शाए गए।
जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने एक ठेकेदार को 4.2 करोड़ रुपए कैश में दिए, जिसे रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया गया।
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फर्जी फ्लैट खरीद और मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा
ED के अनुसार, व्यापारी त्रिलोक सिंह ढिल्लन ने अपने कर्मचारियों के नाम पर 19 फ्लैट खरीदने के लिए 5 करोड़ रुपए बघेल डेवलपर्स को ट्रांसफर किए।
यह राशि वास्तव में बघेल की कंपनियों तक पहुंचाने के लिए “फर्जी निवेश” के रूप में उपयोग की गई थी।
साथ ही, भिलाई के एक ज्वेलर्स ने 5 करोड़ रुपए का “लोन” दिखाया, जो बाद में प्लॉट खरीदी के बहाने वापस कर दिया गया।
एजेंसी का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क “ब्लैक मनी को सफेद दिखाने” की प्रक्रिया का हिस्सा था।
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1000 करोड़ की लेयरिंग और राजनीतिक कनेक्शन
ED के वकील सौरभ पांडेय ने कोर्ट में बताया कि शराब घोटाले के पैसे कई स्तरों पर लेयरिंग के जरिए आगे बढ़ाए गए।
उन्होंने कहा —
> “यह धन पहले अनवर ढेबर के पास गया, फिर दीपेन चावड़ा, के.के. श्रीवास्तव और कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के माध्यम से चैतन्य बघेल तक पहुंचा।”
एजेंसी ने दावा किया है कि इस पूरी प्रक्रिया की पुष्टि अनवर ढेबर के मोबाइल चैट और रिकॉर्डिंग्स से हुई है।
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बचाव पक्ष का तर्क: ‘राजनीतिक बदले की कार्रवाई’
बचाव पक्ष के वकील फैजल रिजवी ने आरोप लगाया कि चैतन्य बघेल को केवल पप्पू बंसल के बयान के आधार पर गिरफ्तार किया गया है, जबकि उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है।
उन्होंने कहा —
> “पप्पू बंसल पर खुद नॉन-बेलेबल वारंट जारी है, और वही बयान इस गिरफ्तारी का आधार बना है। चैतन्य बघेल ने जांच में हमेशा सहयोग किया है, उनके घर पर हुई रेड में मांगे गए सभी दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।”
रिजवी ने आगे कहा कि,
> “कानून को ताक पर रखकर यह गिरफ्तारी की गई है। चैतन्य बघेल का अपराध सिर्फ इतना है कि वे पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे हैं।”
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अदालत और जांच की अगली प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट पहले ही निर्देश दे चुका है कि ED तीन महीने और EOW दो महीने के भीतर जांच पूरी करे।
चैतन्य बघेल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि तीन महीने में जांच पूरी की जाएगी।
EOW और ED की संयुक्त जांच में अब तक कई दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अकाउंटिंग रिकॉर्ड जब्त किए जा चुके हैं।
एजेंसियां अब रियल एस्टेट कंपनियों, ठेकेदारों और राजनीतिक संपर्कों की जांच गहराई से कर रही हैं।
