छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने ED और EOW को तीन महीने में जांच पूरी करने का दिया आदेश, दिसंबर तक मांगी रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को बड़ा निर्देश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने दोनों एजेंसियों को आदेश दिया है कि वे दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह तक अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट पेश करें। कोर्ट ने कहा है कि इस मामले की जांच करीब दो साल से चल रही है, और अब इसे जल्द से जल्द नतीजे तक पहुंचाया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश सितंबर 2025 के आखिरी सप्ताह में अपलोड किया गया, जिसके बाद ED और EOW ने अपनी जांच की रफ्तार तेज कर दी है। दोनों एजेंसियों ने आरोपियों और संदिग्ध अधिकारियों से पूछताछ का सिलसिला तेज कर दिया है।

30 आबकारी अधिकारी जांच के दायरे में

प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग के 30 अधिकारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं, जिनमें 7 रिटायर्ड अधिकारी भी शामिल हैं। इन अधिकारियों की भूमिका शराब घोटाले में संदिग्ध मानी जा रही है और ED ने उनके खिलाफ सबूत जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

“केस को मुकाम तक पहुंचाना होगा” – ED

ED के वकील सौरभ पांडे ने जानकारी देते हुए कहा,

> “सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि जांच को दो साल से ज्यादा हो चुके हैं। अब इसे नतीजे तक पहुंचाना ज़रूरी है। हम सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई समयसीमा के भीतर अपनी फाइनल रिपोर्ट पेश करेंगे।”

 

क्या है मामला?

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला एक बड़ा वित्तीय अनियमितता का मामला है, जिसमें राज्य के आबकारी विभाग पर शराब की बिक्री और खरीद में भारी गड़बड़ियों का आरोप है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह करोड़ों रुपये का घोटाला हो सकता है, जिसमें राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया और अवैध तरीके से धन अर्जित किया गया।

आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब ED और EOW दोनों पर समयसीमा के भीतर जांच पूरी करने का दबाव है। अगर जांच एजेंसियां दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट पेश करती हैं, तो इस बहुचर्चित मामले में जल्द बड़ी कार्रवाई या चार्जशीट सामने आ सकती है।