नई दिल्ली। दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में सोमवार को IRCTC घोटाला मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने इस केस में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि टेंडर घोटाले की साजिश लालू यादव की जानकारी में रची गई थी और टेंडर प्रक्रिया में उनकी सीधी दखलअंदाजी थी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने लालू यादव से पूछा —
> “क्या आप आरोप स्वीकार करते हैं या ट्रायल का सामना करेंगे?”
इस पर लालू यादव ने जवाब दिया —
“सभी आरोप गलत हैं।”
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आज ‘लैंड फॉर जॉब’ केस की भी सुनवाई
इसी मामले से जुड़े एक अन्य केस ‘लैंड फॉर जॉब’ घोटाले में भी आज सुनवाई होनी है। इसमें भी चार्ज फ्रेम किए जाएंगे, हालांकि इस केस में लालू या तेजस्वी यादव की मौजूदगी जरूरी नहीं है।
इस मामले में पिछली सुनवाई 25 अगस्त 2025 को हुई थी, जिसमें कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
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क्या है पूरा मामला
यह घोटाला साल 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे।
CBI का आरोप है कि इस दौरान IRCTC के दो होटलों — पुरी और रांची स्थित BNR होटल्स — के रखरखाव का ठेका सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की निजी फर्म को गलत तरीके से दिया गया।
जांच एजेंसी के मुताबिक, इस सौदे के बदले लालू यादव के परिवार को पटना में एक बेशकीमती जमीन दी गई थी।
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CBI की रिपोर्ट में क्या कहा गया
CBI के एडिशनल डायरेक्टर राकेश अस्थाना ने कोर्ट में बताया था कि रेल मंत्री रहते हुए लालू यादव ने पुरी और रांची के होटल IRCTC को ट्रांसफर किए थे।
इनके रखरखाव और विकास के लिए इन्हें लीज पर देने की योजना बनी थी।
इसके लिए मेसर्स सुजाता होटल्स (विनय और विजय कोचर की कंपनी) को टेंडर दिया गया, जिसमें कथित तौर पर अनियमितताएं और हेरा-फेरी की गई थीं।
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2017 में हुई थी FIR, 12 ठिकानों पर छापे
17 जुलाई 2017 को CBI ने इस मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य पांच आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की थी।
छापेमारी के दौरान सुजाता होटल्स के निदेशकों विनय और विजय कोचर समेत कुल 12 ठिकानों से दस्तावेज जब्त किए गए थे।
