छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और पाटन से कांग्रेस विधायक भूपेश बघेल की विधानसभा सदस्यता को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। जस्टिस अरविंद वर्मा की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह याचिका भाजपा सांसद विजय बघेल द्वारा दायर की गई है, जिसमें भूपेश बघेल पर आचार संहिता उल्लंघन का आरोप लगाते हुए उनके निर्वाचन को रद्द करने की मांग की गई है।
क्या है मामला?
विजय बघेल ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान भूपेश बघेल ने तय समय सीमा के बाद भी प्रचार जारी रखा, जो चुनाव आयोग की आचार संहिता का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि यह गंभीर चुनावी अपराध है और इससे निर्वाचन की निष्पक्षता पर प्रश्न उठते हैं। याचिका में यह मांग की गई है कि इस आधार पर भूपेश बघेल की विधायकी रद्द की जाए।
भूपेश बघेल की ओर से जवाब
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ओर से कोर्ट में 16 बिंदुओं का जवाब दाखिल किया गया, जिसमें यह कहा गया कि याचिका में लगाए गए आरोप निराधार हैं। उन्होंने दावा किया कि न तो याचिकाकर्ता ने किसी तरह का प्रत्यक्ष प्रमाण प्रस्तुत किया है, और न ही कोई ऐसा ठोस साक्ष्य दिया गया है जिससे यह सिद्ध हो कि उन्होंने आचार संहिता का उल्लंघन किया।
कोर्ट ने याचिका खारिज करने की मांग ठुकराई
भूपेश बघेल की ओर से पहले यह आग्रह किया गया था कि याचिका को चलने योग्य नहीं मानते हुए खारिज कर दिया जाए, लेकिन कोर्ट ने यह मांग खारिज कर दी और कहा कि याचिका में पर्याप्त आधार हैं, जिन पर सुनवाई की जा सकती है।
अब सबकी निगाहें कोर्ट के फैसले पर
14 अक्टूबर को हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हाईकोर्ट क्या निर्णय देती है — क्या भूपेश बघेल की विधायकी पर असर पड़ेगा या याचिका खारिज कर दी जाएगी।
