रायपुर। राजधानी रायपुर में पुलिस प्रशासन को और अधिक सशक्त और प्रभावी बनाने के लिए पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में है। गृह विभाग ने इस संबंध में सभी आवश्यक प्रक्रियाएं लगभग पूरी कर ली हैं और संभावना जताई जा रही है कि दिवाली के बाद होने वाली कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लग सकती है। यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार हुआ तो 1 नवंबर 2025 से रायपुर में यह नई प्रणाली लागू हो जाएगी।
गृह विभाग ने इस दिशा में गंभीर कदम उठाते हुए कुछ समय पहले पुलिस मुख्यालय (PHQ) से विस्तृत प्रतिवेदन मांगा था। इसके बाद एडीजी प्रदीप गुप्ता की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया। इस समिति में आईजी अजय यादव, आईजी अमरेश मिश्रा, डीआईजी ओपी पाल, एसपी अभिषेक मीणा और एसपी संतोष सिंह जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
समिति ने देश के विभिन्न राज्यों में लागू पुलिस कमिश्नर प्रणाली का गहराई से अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी है। रिपोर्ट में रायपुर की भौगोलिक, सामाजिक और सुरक्षा आवश्यकताओं के आधार पर यह प्रणाली लागू करने की सिफारिश की गई है।
अब यह प्रस्ताव राज्य कैबिनेट की मंजूरी के इंतजार में है। बताया जा रहा है कि पुलिस कमिश्नर पद के लिए चार सीनियर आईपीएस अधिकारियों के नाम चर्चा में हैं, वहीं एडिशनल पुलिस कमिश्नर पद के लिए भी चार दावेदारों की रेस चल रही है।
पुलिस कमिश्नर प्रणाली क्यों है अहम?
पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद पुलिस को मजिस्ट्रेटी शक्तियां भी मिल जाती हैं, जिससे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए त्वरित और प्रभावी निर्णय लिए जा सकते हैं। इस प्रणाली में पुलिस आयुक्त (कमिश्नर) के पास अधिक अधिकार होते हैं, जिससे प्रशासनिक जटिलताओं को कम किया जा सकता है।
क्या होगा बदलाव?
शहर में कानून व्यवस्था से जुड़े फैसलों के लिए पुलिस को अब कलेक्टर या मजिस्ट्रेट पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
ट्रैफिक नियंत्रण, अपराध पर त्वरित कार्रवाई और भीड़ प्रबंधन जैसे कार्यों में अधिक दक्षता आएगी।
जनता को बेहतर और जवाबदेह पुलिस व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
