दिवाली के बाद निकला पटाखों का 400 टन कचरा, पहली बार भेजा जाएगा पीथमपुर हेजर्डस वेस्ट निस्तारण के लिए

इंदौर। दिवाली की जगमगाहट के बाद शहर की सड़कों पर जले हुए पटाखों का ढेर दिखाई देने लगा है। इस बार खास बात यह है कि इन अवशेषों को आम कचरे के साथ दफन नहीं किया जाएगा, बल्कि पहली बार खतरनाक अपशिष्ट (हेजर्डस वेस्ट) के रूप में विशेष प्रक्रिया के तहत पीथमपुर भेजा जाएगा। वहां निगम की अनुबंधित फर्म इस कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निष्पादन करेगी।

नगर निगम ने इसके लिए विशेष तैयारी की है। दिवाली की रात इंदौर में करीब 15 करोड़ रुपए के पटाखे फोड़े गए। इससे उत्पन्न कचरा सामान्य दिनों की तुलना में करीब 300 टन अधिक हो गया। अनुमान है कि यह आंकड़ा 400 टन तक पहुंच सकता है।

11 हजार सफाईकर्मी जुटे सफाई अभियान में

नगर निगम ने दिवाली के बाद सफाई के लिए करीब 11,000 सफाई कर्मचारियों को मैदान में उतारा है। पटाखों के कचरे को अन्य सूखे कचरे से अलग करके हेजर्डस वेस्ट के रूप में संग्रहित किया जा रहा है। यह कचरा शहर के विभिन्न गार्बेज ट्रांसफर स्टेशनों पर एकत्र किया जाएगा, जहां से इसे कंटेनरों के जरिए पीथमपुर स्थित वैज्ञानिक निस्तारण स्थल तक पहुंचाया जाएगा।

अब तक लैंडफिल में दबाया जाता था कचरा

अब तक पटाखों के अवशेषों को आदमपुर छावनी स्थित साइंटिफिक लैंडफिल साइट में अन्य इनर्ट वेस्ट के साथ दफनाया जाता रहा है। लेकिन इस बार से निगम ने पर्यावरणीय दृष्टिकोण से अधिक सतर्कता बरती है। एमआईसी सदस्य बघेल ने बताया कि आम दिनों में जहां डोर-टू-डोर कचरा गाड़ी दो से तीन बार जाती थी, वहीं मंगलवार को यह संख्या चार से छह बार तक बढ़ाई गई।

क्यों है हेजर्डस वेस्ट?

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार पटाखों के अवशेषों में बारूद और मैटलिक कंपाउंड्स की मौजूदगी के कारण इन्हें हेजर्डस वेस्ट की श्रेणी में रखा गया है। जले हुए पटाखों की कैलोरिफिक वैल्यू कम होती है, जिससे इनका सामान्य तरीके से निस्तारण करना मुश्किल होता है। इसलिए इनका वैज्ञानिक निष्पादन आवश्यक है।

निगम की पहल से बढ़ेगी जागरूकता

नगर निगम की यह पहल न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि इससे शहरवासियों में कचरा प्रबंधन को लेकर जागरूकता भी बढ़ेगी। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में अन्य त्योहारों के बाद निकलने वाले अपशिष्ट के लिए भी इसी तरह की योजनाएं बनाई जाएंगी।