DFO धम्मशील गढ़वीर का बेहतरीन आयोजन…. बारनवापारा अभयारण्य में सम्पन्न हुआ बटरफ्लाई एंड मॉथ सर्वे 2025 — देशभर से आए 42 विशेषज्ञों ने दर्ज की जैव विविधता

योगेश यादव/ बलौदाबाजार जिले के प्रसिद्ध बारनवापारा अभयारण्य में तीन दिवसीय “बटरफ्लाई एंड मॉथ सर्वे 2025” का सफल आयोजन 6 से 8 नवंबर तक किया गया। देश के विभिन्न हिस्सों से आए कुल 42 प्रतिभागियों ने इस सर्वेक्षण में भाग लेकर अभयारण्य में पाई जाने वाली तितलियों और मॉथ (पतंगों) की विविध प्रजातियों का अध्ययन किया।

प्रतिभागियों को कई टीमों में बांटकर घने वनों, घास के मैदानों, जलस्रोतों के किनारों और ग्रामीण सीमाओं में सर्वे कराया गया। इस दौरान सैकड़ों प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की गई, जिनमें कई दुर्लभ और आकर्षक तितलियां शामिल थीं।

प्रकृति संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल:
वनमंडलाधिकारी गणवीर धम्मशील ने कहा कि यह आयोजन न केवल जैव विविधता संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करता है, बल्कि प्रकृति से जुड़ने और उसे समझने की प्रेरणा भी देता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों, विशेषज्ञों, वालंटियर्स और स्टाफ को इस सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया।

उन्होंने बताया कि सर्वे से प्राप्त आंकड़े बारनवापारा क्षेत्र में तितलियों की प्रजातियों की पहचान, आवास संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन में उपयोगी सिद्ध होंगे।

सांस्कृतिक रंगों से सजा आयोजन:
सर्वे की शुरुआत 6 नवंबर को परिचय सत्र से हुई, जिसमें प्रतिभागियों को अभयारण्य की जैव विविधता, इतिहास और संरक्षण कार्यों की जानकारी दी गई। इसके बाद बार पर्यटन ग्राम का भ्रमण कराया गया, जहाँ प्रतिभागियों ने बार म्यूज़ियम, हेरिटेज स्टे होम्स और रेस्ट हाउस का अवलोकन किया।

शाम को छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसने प्रतिभागियों को प्रदेश की लोकसंस्कृति और परंपराओं से रूबरू कराया।

वैज्ञानिक ढंग से सम्पन्न हुआ सर्वे:
7 नवंबर की सुबह और शाम में तितली सर्वे ट्रेल्स आयोजित की गईं, जबकि रात्रि के समय मॉथ सर्वे किया गया, जो वैज्ञानिक पद्धति से सम्पन्न हुआ। अंतिम दिन प्रतिभागियों ने डेटा संकलन पूरा कर समापन समारोह में हिस्सा लिया। समारोह में सभी प्रतिभागियों और विशेषज्ञों को प्रमाण पत्र एवं पौधे भेंट किए गए।

विशेषज्ञों और अधिकारियों की भूमिका:
सर्वे में प्रमुख बटरफ्लाई विशेषज्ञ गौरव निहलानी, डॉ. अजय मिश्रा, डॉ. रवीकांत दास, लाल बहादुर, सुनील बाजपेयी और आकांक्षा चंद्राकर ने मार्गदर्शन दिया। आयोजन में अधीक्षक कृषानू चंद्राकार, वन परिक्षेत्र अधिकारी गोपाल प्रसाद वर्मा और जीवन लाल साहू की अहम भूमिका रही।