सहारा समूह की कंपनियों से अपने लंबित वेतन की मांग कर रहे कर्मचारियों की अंतरिम याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। इस मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष होगी। कर्मचारियों ने कई महीनों से वेतन न मिलने की शिकायत करते हुए जल्द राहत की मांग की है।
14 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने मांगा था जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने 14 अक्टूबर को सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड (SICCL) की याचिका पर केंद्र सरकार, सेबी, और अन्य हितधारकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
SICCL ने अपनी 88 प्रमुख संपत्तियों को अदाणी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को बेचने की मंजूरी मांगी थी, ताकि बकाया भुगतान का निपटारा किया जा सके।
SICCL की मुख्य याचिका पहले से ही 17 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। शुक्रवार को वकीलों ने आग्रह किया कि कर्मचारियों की याचिकाओं को भी सुनवाई में शामिल किया जाए, ताकि वेतन संबंधी मुद्दे पर जल्द निर्णय हो सके।
कोर्ट ने अन्य मंत्रालयों को भी बनाया पक्षकार
इससे पहले पीठ ने, सहारा समूह के लंबे समय से लंबित धन-वापसी मामलों की सुनवाई के दौरान, SICCL के अंतरिम आवेदन पर कार्रवाई की थी।
पीठ ने वित्त मंत्रालय और सहकारिता मंत्रालय को भी इस मामले का पक्षकार बनाने का निर्देश दिया। साथ ही, न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर नफड़े को आदेश दिया गया कि SICCL द्वारा अदाणी समूह को बेची जाने वाली प्रस्तावित 88 संपत्तियों का पूरा ब्यौरा अदालत में प्रस्तुत किया जाए।
कर्मचारियों को महीनों से नहीं मिला वेतन
सहारा समूह से जुड़े कर्मचारियों ने याचिका में कहा कि उन्हें कई महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे आर्थिक संकट गहरा गया है। कर्मचारियों की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि संपत्तियों की बिक्री और बकाया भुगतानों को लेकर स्पष्ट रोडमैप के अभाव में उनकी समस्याएं लगातार बनी हुई हैं।
आज की सुनवाई पर सभी की निगाहें
माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट आज की सुनवाई में कर्मचारियों के वेतन भुगतान को लेकर अंतरिम आदेश दे सकता है या फिर संपत्तियों की बिक्री पर आगे का रुख तय कर सकता है।
सहारा समूह से जुड़े निवेशकों और कर्मचारियों, दोनों के लिए यह सुनवाई अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
