प्रदेश में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके हमलों को रोकने के लिए सरकार ने व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के बाद राज्य शासन ने सभी प्रमुख विभागों को पत्र जारी कर स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और बड़े सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों की एंट्री पूरी तरह बंद करने के निर्देश दिए हैं।
1 सप्ताह में होगी संवेदनशील जगहों की पहचान
सभी विभागों को आदेश दिया गया है कि वे एक सप्ताह के भीतर ऐसी जगहों की पहचान करें जहाँ आवारा कुत्तों की बिना रोक-टोक एंट्री है। पहचान के बाद उन स्थानों पर गेट, फेंसिंग, बाउंड्रीवॉल या अन्य सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। अभियान को प्रभावी बनाने के लिए हर संस्थान में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा।
स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड—सबमें कड़ा सर्वे
अभियान के पहले चरण में प्रत्येक संस्था के प्रमुख—
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स्कूल: प्राचार्य
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अस्पताल: सीएमओ/अधीक्षक
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बस स्टैंड/स्टेशन: मैनेजर
यह पहचान करेंगे कि कुत्ते उनके परिसर में किस मार्ग से प्रवेश कर रहे हैं, और उसके बाद एंट्री रोकने का इंतजाम करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर अन्य सरकारी विभागों की मदद ली जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने लिया था स्वत: संज्ञान
हाल ही में देशभर में कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्यों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए थे। उसी के पालन में प्रदेश सरकार ने आधा दर्जन से अधिक विभागों की जिम्मेदारी तय की है।
विभागवार जिम्मेदारियाँ
पशुधन विकास विभाग
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आवारा कुत्तों की नसबंदी
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आश्रय स्थलों पर पशु चिकित्सकों की नियुक्ति
स्वास्थ्य विभाग
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सभी सरकारी-निजी अस्पतालों में एंटी-रैबीज़ वैक्सीन (ARV) और इम्यूनोग्लोबुलिन का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराना
लोक निर्माण विभाग (PWD)
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कुत्तों की एंट्री वाले मार्गों की पहचान में सहयोग
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फेंसिंग, गेट, बाउंड्रीवॉल आदि का निर्माण
शिक्षा विभाग
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स्कूलों में छात्रों और स्टाफ की सुरक्षा
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काटने की घटना पर तुरंत इलाज की व्यवस्था
