रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रख्यात साहित्यकार, कवि और उपन्यासकार विनोद कुमार शुक्ल को शुक्रवार को उनके रायपुर स्थित निवास पर हिंदी का सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया। ज्ञानपीठ के महाप्रबंधक आर.एन. तिवारी ने वाग्देवी की प्रतिमा और पुरस्कार का चेक सौंपकर उन्हें सम्मानित किया। इस सम्मान के साथ वे छत्तीसगढ़ के पहले साहित्यकार बन गए हैं जिन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ है।
“भाषा या विचार नष्ट होना, मनुष्यता का नष्ट होना है”
सम्मान प्राप्त करने के बाद विनोद कुमार शुक्ल ने कहा—
“जब हिन्दी भाषा सहित तमाम भाषाओं पर संकट की बात कही जा रही है, मुझे पूरी उम्मीद है कि नई पीढ़ी हर भाषा और हर विचारधारा का सम्मान करेगी। किसी भाषा या अच्छे विचार का नष्ट होना, मनुष्यता का नष्ट होना है।”
उनकी यह टिप्पणी भाषा और साहित्यिक विरासत के महत्व को रेखांकित करती है।
प्रधानमंत्री ने भी जाना था हाल-चाल
कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के 25वें स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान रायपुर में विनोद कुमार शुक्ल से मुलाकात की थी। तब साहित्यकार ने उनसे कहा था—
“लिखना मेरे लिए सांस लेने जैसा है। मैं जल्द से जल्द घर लौटना चाहता हूं—मैं लिखना जारी रखना चाहता हूं।”
उनके इस कथन ने देशभर के साहित्यप्रेमियों को प्रभावित किया था।
साहित्य की दुनिया में अनमोल योगदान
विनोद कुमार शुक्ल आधुनिक हिंदी साहित्य के सबसे संवेदनशील और मौलिक लेखकों में गिने जाते हैं। उनकी रचनाएं अपनी विशिष्ट भाषा, सरलता और गहरी मानवीय संवेदना के लिए जानी जाती हैं। ज्ञानपीठ सम्मान मिलने से छत्तीसगढ़ के साहित्य जगत में खुशी की लहर है।
