दुर्ग जिले के पुलगांव स्थित बाल संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। 28 नवंबर की रात अवसर पाकर 7 नाबालिग आपचारी बच्चे संप्रेक्षण गृह से फरार हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने ताबड़तोड़ सर्च ऑपरेशन चलाया और 4 बच्चों को 29 नवंबर को ही बरामद कर लिया, लेकिन 3 बच्चे अब भी लापता हैं। आशंका जताई जा रही है कि ये बच्चे जिला छोड़कर बाहर निकल गए हैं।
🔴 एक महीने में दूसरी बड़ी घटना
यह मामला कोई नया नहीं है। पुलगांव बाल संप्रेक्षण गृह से बच्चों के भागने की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं।
3 नवंबर को भी 3 आपचारी बालक फरार हुए थे, जिनमें हत्या व लूट जैसे गंभीर अपराधों में शामिल नाबालिग भी थे।
अब 26 दिन बाद फिर 7 बालक भाग निकले।
लगातार हो रही इन घटनाओं ने संस्था की सुरक्षा और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
🔴 दीवार फांदकर भाग जा रहे हैं बच्चे
पुलिस के मुताबिक, बच्चे आमतौर पर दीवार फांदकर पीछे के हिस्से से निकल जाते हैं।
सुरक्षा के बार-बार किए जा रहे दावों के बावजूद विभाग बच्चों को नियंत्रित करने में असफल साबित हो रहा है।
इसका सीधा असर पुलिस पर पड़ रहा है, जिसे बार-बार नाबालिगों की खोजबीन में लगाया जाता है।
🔴 विभाग की चुप्पी भी सवालों में
बाल सुधार गृह का संचालन महिला एवं बाल विकास विभाग करता है।
लगातार हो रहे सुरक्षा उल्लंघन के बावजूद
न तो अधिकारी स्पष्ट जानकारी दे रहे हैं
न ही इस पर कोई ठोस कार्रवाई दिखाई दे रही है।
सूत्रों के अनुसार, इस बार के फरार बच्चों में गंभीर अपराधों में शामिल नाबालिग भी हैं, लेकिन विभाग की नाकामी फिर सामने आई है।
🔴 3 बच्चे अब भी लापता, बाहर जाने की खबर
चार बच्चों को आसपास के क्षेत्रों से पकड़ लिया गया, लेकिन बाकी 3 नाबालिगों के दुर्ग जिले से बाहर जाने की सूचना है।
फिलहाल पुलिस की कई टीमेें इनकी तलाश में जुटी हैं।
पुलगांव थाना प्रभारी को भी इस घटना पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है, जिससे व्यवस्था की खामियाँ और उजागर हो रही हैं।
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सवाल जो उठ रहे हैं
लगातार दो बार बच्चों के फरार होने के बावजूद सुरक्षा में सुधार क्यों नहीं?
दीवार फांदकर बार-बार भागने पर कोई ठोस व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
महिला एवं बाल विकास विभाग लगातार चुप क्यों है?
लगातार बढ़ती घटनाएँ यह संकेत दे रही हैं कि बाल सुधार गृह की सुरक्षा और प्रबंधन दोनों में बड़े सुधार की आवश्यकता है।
