नई दिल्ली। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में आज एक बड़ा और अहम फैसला लिया गया है। सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MNREGA) का नाम बदलकर “पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना” करने को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही ग्रामीण मजदूरों को बड़ी राहत देते हुए गारंटीकृत रोजगार के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, इस योजना के तहत मिलने वाली न्यूनतम मजदूरी को भी बढ़ाकर 240 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है। यह फैसला ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और गरीब व जरूरतमंद परिवारों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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क्या था मनरेगा
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) एक श्रम कानून और सामाजिक सुरक्षा योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में काम के अधिकार की गारंटी देना है। इसके तहत हर ग्रामीण परिवार को, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हों, एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 100 दिनों का मजदूरी रोजगार उपलब्ध कराया जाता था।
किन कार्यों का मिलता है रोजगार
मनरेगा (अब पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना) के अंतर्गत श्रमप्रधान कार्य कराए जाते हैं। इनमें
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ग्रामीण सड़कों का निर्माण
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जल संरक्षण एवं जल संचयन कार्य
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तालाबों की खुदाई
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बागवानी और वृक्षारोपण
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अन्य सामुदायिक विकास कार्य
शामिल हैं। इस योजना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा देने, पलायन कम करने और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।
मजदूरों को क्या होगा फायदा
योजना का नाम बदलने के साथ ही इसके दायरे और लाभों को भी बढ़ाया गया है। अब ग्रामीण मजदूरों को 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी मिलेगी, जिससे उनकी वार्षिक आय में सीधा इजाफा होगा। वहीं मजदूरी दर 240 रुपये प्रतिदिन किए जाने से महंगाई के इस दौर में मजदूर परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकार का मानना है कि पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आय और विकास को नई गति मिलेगी और आत्मनिर्भर गांवों के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।
