NPS निवेशकों को बड़ी राहत: PFRDA ने बदले नियम, लॉक-इन खत्म, एकमुश्त निकासी बढ़ी

नई दिल्ली। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए आम नागरिकों और प्राइवेट सेक्टर के निवेशकों को बड़ी राहत दी है। 16 दिसंबर 2025 को नोटिफाई किए गए PFRDA (Exits and Withdrawals under the National Pension System) Amendment Regulations, 2025 के तहत एनपीएस को पहले से ज्यादा लचीला और निवेशक-अनुकूल बना दिया गया है।

गैर-सरकारी निवेशकों के लिए खत्म हुआ 5 साल का लॉक-इन

अब तक एनपीएस में निवेश करने वालों के लिए सबसे बड़ी परेशानी 5 साल का लॉक-इन पीरियड था। पुराने नियमों के तहत गैर-सरकारी सब्सक्राइबर्स को खाता खोलने के बाद 5 साल तक बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी।
नए नियमों के तहत प्राइवेट सेक्टर और आम नागरिकों के लिए यह लॉक-इन पूरी तरह हटा दिया गया है। इससे उन लोगों को फायदा मिलेगा जो लंबे समय तक पैसा फंसे रहने के डर से एनपीएस में निवेश नहीं कर पा रहे थे। हालांकि, सरकारी कर्मचारियों के लिए 5 साल का लॉक-इन पहले की तरह लागू रहेगा।

एग्जिट रूल्स में बड़ा बदलाव, एकमुश्त निकासी बढ़ी

NPS से बाहर निकलते समय निकासी के नियमों (Exit Rules) में भी अहम संशोधन किया गया है। पहले रिटायरमेंट या एग्जिट के समय कुल कॉर्पस का कम से कम 40% हिस्सा एन्युटी (पेंशन प्लान) में लगाना जरूरी था और सिर्फ 60% रकम ही एकमुश्त निकाली जा सकती थी।

अब नए नियमों के अनुसार—

  • यदि कुल कॉर्पस 12 लाख रुपये से अधिक है, तो

    • 80% राशि एकमुश्त निकाली जा सकेगी

    • केवल 20% रकम से एन्युटी खरीदना अनिवार्य होगा

इस बदलाव से रिटायर होने वाले निवेशकों के हाथ में ज्यादा नकदी आएगी, जिसका उपयोग वे घर बनाने, बच्चों की शादी, कर्ज चुकाने या अन्य निवेश में कर सकेंगे।

छोटे निवेशकों के लिए और आसान नियम

PFRDA ने छोटे और मध्यम निवेशकों को भी बड़ी राहत दी है—

  • कॉर्पस 8 लाख रुपये या उससे कम:

    • एन्युटी खरीदने की कोई बाध्यता नहीं

    • 100% पैसा एकमुश्त निकाल सकते हैं

  • कॉर्पस 8 लाख से ज्यादा और 12 लाख तक:

    • अधिकतम 6 लाख रुपये एकमुश्त निकासी

    • शेष राशि कम से कम 6 साल की एन्युटी स्कीम में निवेश करना होगा

अब 85 साल की उम्र तक निवेश का मौका

नए नियमों के तहत निवेशकों को अब 85 वर्ष की आयु तक NPS में निवेश जारी रखने की अनुमति होगी। पहले यह सीमा कई मामलों में 70 या 75 साल तक ही थी।
इसका मतलब यह है कि अगर किसी व्यक्ति को 60 साल की उम्र में पैसों की जरूरत नहीं है, तो वह अपने फंड को और लंबे समय तक छोड़कर अतिरिक्त कंपाउंडिंग का लाभ ले सकता है।

सरकारी कर्मचारियों पर नहीं होगा असर

PFRDA ने स्पष्ट किया है कि ये बदलाव मुख्य रूप से गैर-सरकारी क्षेत्र के लिए हैं। सरकारी कर्मचारियों के लिए नियम पहले जैसे ही रहेंगे—

  • 5 साल का लॉक-इन अनिवार्य

  • 60 साल के बाद एग्जिट पर

    • फंड 5 लाख से अधिक होने पर 40% एन्युटी, 60% नकद

  • केवल तब 100% निकासी संभव है जब कुल फंड 5 लाख रुपये से कम हो

क्यों अहम हैं ये बदलाव?

विशेषज्ञों का मानना है कि इन संशोधनों से एनपीएस की लोकप्रियता बढ़ेगी और ज्यादा लोग इसे रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए अपनाएंगे। लॉक-इन खत्म होने और ज्यादा एकमुश्त निकासी की सुविधा से एनपीएस अब पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आकर्षक निवेश विकल्प बन गया है।