भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा ने अपने स्थापना के 69 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर आज 17 दिसंबर को विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र आयोजित किया गया है। इस सत्र में प्रदेश के विकास, आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश और विकसित भारत के संकल्प पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
यह दिन ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि 17 दिसंबर 1956 को मध्यप्रदेश विधानसभा की पहली बैठक आयोजित हुई थी। स्थापना दिवस के मौके पर विधानसभा परिसर में विशेष तैयारियां की गई हैं और सत्र को देखते हुए आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश और विकसित भारत पर चर्चा
विशेष सत्र के दौरान सरकार अपने विकास रोडमैप को सदन के सामने प्रस्तुत करेगी। इसमें प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने, उद्योग, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में मध्यप्रदेश की भूमिका पर विचार किया जाएगा।
इस सत्र की खास बात यह है कि इसमें प्रश्नकाल नहीं होगा। सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य अपने-अपने विचार और सुझाव सीधे सदन में रखेंगे। माना जा रहा है कि यह सत्र नीतिगत विमर्श और भविष्य की दिशा तय करने के लिहाज से अहम रहेगा।
ऐतिहासिक विरासत और भविष्य की दिशा
मध्यप्रदेश विधानसभा ने पिछले 69 वर्षों में लोकतंत्र को मजबूत करने और प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। स्थापना दिवस के अवसर पर न सिर्फ विधानसभा की ऐतिहासिक यात्रा को याद किया जा रहा है, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए विकास और आत्मनिर्भरता का संकल्प भी दोहराया जा रहा है।
विशेष सत्र से प्रदेश के विकास को नई दिशा मिलने और व्यापक नीतिगत संकेत सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।
