व्यापमं घोटाला: पटवारी भर्ती परीक्षा–2008 में फर्जीवाड़ा, 10 आरोपियों को 5-5 साल की सश्रम कैद

सोमवार को व्यापमं घोटाले से जुड़े एक अहम मामले में इंदौर की विशेष सीबीआई अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पटवारी भर्ती परीक्षा–2008 में फर्जीवाड़ा करने के दोषी पाए गए 10 आरोपियों को 5-5 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक आरोपी पर 3 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

पटवारी भर्ती परीक्षा में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल

यह मामला वर्ष 2008 में आयोजित पटवारी भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। जांच के दौरान सामने आया कि कुछ उम्मीदवारों ने फर्जी प्रमाण पत्र और दस्तावेजों का उपयोग कर परीक्षा में चयन हासिल किया था। इससे न सिर्फ परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हुई, बल्कि योग्य अभ्यर्थियों के अधिकारों का भी हनन हुआ।

दोषी करार दिए गए आरोपी

विशेष सीबीआई अदालत ने जिन आरोपियों को दोषी ठहराया है, उनमें
रामेश्वर, राकेश, देवेंद्र, चेतन, बलराम, हरपाल, गोपाल, जितेंद्र, दिनेश और दिग्विजय सिंह सोलंकी शामिल हैं।

2012 में दर्ज हुई थी एफआईआर

मामले की शुरुआत 26 अक्टूबर 2012 को खंडवा जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र में दर्ज एफआईआर से हुई थी। प्रारंभिक जांच के बाद खंडवा पुलिस ने 28 मई 2014 को अदालत में चार्जशीट पेश की थी। इसके बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया और लंबे समय तक ट्रायल चला।

कोर्ट ने माना अभियोजन के आरोप साबित

लंबी सुनवाई के बाद विशेष सीबीआई अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में सफल रहा है। इसी आधार पर सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए पांच वर्ष की सश्रम कैद और जुर्माने की सजा सुनाई गई।

देश का चर्चित भर्ती घोटाला

गौरतलब है कि व्यापमं घोटाला मध्यप्रदेश के सबसे बड़े भर्ती और प्रवेश परीक्षा घोटालों में से एक रहा है। इसमें नकल, फर्जी दस्तावेज और अवैध चयन जैसे गंभीर आरोप सामने आए थे। मामले के उजागर होने के बाद देशभर में हलचल मच गई थी और अंततः सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जांच सीबीआई को सौंपी गई थी

इस फैसले को व्यापमं घोटाले से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।