सीवेज मिला पानी सप्लाई का मामला: NGT ने यूपी, एमपी और राजस्थान से मांगा जवाब, गंभीर स्वास्थ्य संकट की चेतावनी

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई शहरों में सीवेज से दूषित पानी की आपूर्ति किए जाने को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मीडिया रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) सहित संबंधित एजेंसियों और राज्य सरकारों से जवाब तलब किया है।

मंगलवार को न्यायाधिकरण ने इस मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि दूषित पेयजल की आपूर्ति आम जनता के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रही है और इस पर तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है।

जर्जर ढांचे से पेयजल में मिला सीवेज

जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की अध्यक्षता वाली एनजीटी पीठ ने कहा कि पहली रिपोर्ट में सामने आए तथ्य बेहद चिंताजनक हैं। रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान के उदयपुर, जोधपुर, कोटा, बांसवाड़ा, जयपुर, अजमेर और बोरा सहित कई शहरों में दशकों पुराना और जर्जर जलापूर्ति ढांचा इस समस्या की मुख्य वजह है।

बताया गया है कि पुरानी और क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों के कारण सीवेज का पानी पेयजल पाइपों में मिल गया, जिससे नागरिकों को दूषित पानी की सप्लाई की जा रही है।

गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों की आशंका

एनजीटी ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की स्थिति से संक्रामक बीमारियों, पेट संबंधी रोगों और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर वर्गों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

CPCB और राज्यों से मांगी रिपोर्ट

न्यायाधिकरण ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ-साथ संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और शहरी निकायों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसमें यह बताने को कहा गया है कि—

  • दूषित पानी की आपूर्ति किन कारणों से हो रही है

  • अब तक क्या कदम उठाए गए

  • भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए क्या कार्ययोजना है

एनजीटी ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि लापरवाही पाई गई, तो सख्त निर्देश और कार्रवाई की जा सकती है।

जनस्वास्थ्य बनाम प्रशासनिक लापरवाही

यह मामला एक बार फिर देश के कई शहरों में पुराने बुनियादी ढांचे और कमजोर जल प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। एनजीटी की यह कार्रवाई आने वाले समय में शहरी जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार के लिए अहम मानी जा रही है।