जेफरी एपस्टीन उम्र बढ़ाने के लिए करवा रहा था जेनेटिक एक्सपेरिमेंट, नए दस्तावेजों से बड़ा खुलासा

वॉशिंगटन।
यौन अपराधों के मामले में दोषी ठहराए जा चुके अमेरिकी फाइनेंसर जेफरी एपस्टीन को लेकर एक नया और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी नए दस्तावेजों से पता चलता है कि एपस्टीन अपनी उम्र बढ़ाने और बुढ़ापे की प्रक्रिया को पलटने के लिए जेनेटिक टेस्टिंग और एक्सपेरिमेंटल रिसर्च करवा रहा था।

CNN की रिपोर्ट के अनुसार, 2008 में वेश्यावृत्ति के मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद भी एपस्टीन ने वैज्ञानिकों और रिसर्च संस्थानों से संपर्क बनाए रखा और रीजेनरेटिव मेडिसिन के क्षेत्र में अपने जेनेटिक मैटीरियल के इस्तेमाल की कोशिश की। रीजेनरेटिव मेडिसिन का उद्देश्य नए टिश्यू और अंग विकसित कर शरीर की मरम्मत करना होता है।

जेल जाने के बाद भी चलती रही रिसर्च की कोशिश

नए सामने आए ईमेल्स में खुलासा हुआ है कि एपस्टीन ने अपने DNA और स्टेम सेल्स का इस्तेमाल कर लंबी उम्र से जुड़ी रिसर्च में दिलचस्पी दिखाई। इसके लिए उसने जोसेफ ठाकुरिया, जो उस समय बोस्टन के मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल (MGH) में सीनियर फिजीशियन और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के पर्सनल जीनोम प्रोजेक्ट (PGP) से जुड़े थे, को भुगतान किया।

दस्तावेजों के मुताबिक, जून 2014 में एपस्टीन के जीनोम के कुछ हिस्सों की सीक्वेंसिंग के लिए 2,000 डॉलर का शुरुआती इनवॉइस भेजा गया था। इसमें उसकी लार से लिए गए सैंपल, एक्सोम सीक्वेंसिंग और फाइब्रोब्लास्ट सेल्स की जांच शामिल थी। इनका इस्तेमाल उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को उलटने से जुड़ी रिसर्च में किया जाना था।

‘पर्सनलाइज्ड लॉन्गेविटी स्टडी’ और CRISPR का प्रस्ताव

इनवॉइस में आगे “पर्सनलाइज्ड लॉन्गेविटी स्टडी” का जिक्र भी है, जिसमें CRISPR जीन एडिटिंग टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल का प्रस्ताव दिया गया था। इस तकनीक के जरिए जीन में बदलाव कर उम्र बढ़ाने से जुड़े प्रयोग करने की योजना थी।

दस्तावेजों में नए स्टेम सेल्स बनाने, पूरी जीनोम सीक्वेंसिंग और यहां तक कि एपस्टीन के माता-पिता के जीनोम शामिल करने जैसे विकल्प भी दिए गए थे। सभी प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स की कुल लागत लगभग 1.93 लाख डॉलर आंकी गई थी।

हालांकि CNN के मुताबिक, ऐसा कोई ठोस रिकॉर्ड नहीं मिला है कि एपस्टीन ने शुरुआती 2,000 डॉलर के बाद अतिरिक्त भुगतान किया हो, लेकिन एपस्टीन और रिसर्च टीम के बीच ईमेल के जरिए बातचीत 2015 तक चलती रही।

‘द वीनस प्रोजेक्ट’ का भी जिक्र

दस्तावेजों में “द वीनस प्रोजेक्ट” नाम की एक योजना का भी जिक्र है, जिसकी अनुमानित लागत 1.6 लाख डॉलर थी। इसमें बड़े पैमाने पर जीनोमिक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत बताई गई थी। हालांकि रिसर्चर जोसेफ ठाकुरिया का कहना है कि यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक शुरुआती विचार था और कभी आगे नहीं बढ़ा।

एपस्टीन के वैज्ञानिकों से रिश्तों पर फिर सवाल

इन खुलासों के बाद एक बार फिर एपस्टीन के प्रमुख वैज्ञानिकों और एलीट रिसर्च संस्थानों से संबंधों पर सवाल उठने लगे हैं। हार्वर्ड के जाने-माने जीनोमिक्स वैज्ञानिक जॉर्ज चर्च ने पहले ही एपस्टीन से अपने पुराने संबंधों को स्वीकार करते हुए 2019 में माफी मांगी थी।

साजिश की थ्योरी फिर चर्चा में

इन दस्तावेजों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और इंटरनेट पर यह साजिशी थ्योरी भी फिर से चर्चा में आ गई है कि कहीं एपस्टीन ने 2019 में अपनी मौत का नाटक तो नहीं किया। हालांकि जारी दस्तावेजों में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि एपस्टीन जिंदा है।

फिलहाल, अमेरिकी अधिकारी साफ कर चुके हैं कि राहत और जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहराई से समीक्षा की जाएगी।