RBI के आंकड़ों का खुलासा, गोल्ड वैल्यू में तेज गिरावट बनी मुख्य वजह, करेंसी एसेट्स में इजाफा
देश का फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व 6 फरवरी को समाप्त होने वाले सप्ताह में $671.1 करोड़ घटकर $71,706.4 करोड़ पर आ गया है। इससे पहले के सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $72,377.4 करोड़ के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचा था। फोरेक्स रिजर्व में आई इस गिरावट का खुलासा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों में हुआ है।
गोल्ड रिजर्व में भारी गिरावट
RBI के आंकड़ों के मुताबिक, सरकारी खजाने में मौजूद गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में तेज गिरावट दर्ज की गई है। 6 फरवरी को खत्म सप्ताह में गोल्ड रिजर्व घटकर $12,347.6 करोड़ रह गया। इस दौरान इसमें करीब $1,420.8 करोड़ (लगभग ₹1.29 लाख करोड़) की बड़ी गिरावट आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में आई तेज गिरावट के कारण गोल्ड रिजर्व की वैल्यू कम हुई है, जिससे कुल फोरेक्स रिजर्व पर दबाव पड़ा।
करेंसी एसेट्स में बढ़ोतरी
हालांकि राहत की बात यह रही कि इस अवधि में फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) में इजाफा देखने को मिला। 6 फरवरी को समाप्त सप्ताह में FCA $766.1 करोड़ बढ़कर $57,005.3 करोड़ पर पहुंच गया। पिछले कुछ हफ्तों से फोरेक्स किटी में कुल मिलाकर बढ़ोतरी का ट्रेंड बना हुआ है।
क्या होते हैं फोरेक्स रिजर्व?
फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व वे संपत्तियां होती हैं, जिन्हें किसी देश का केंद्रीय बैंक अपने पास रखता है। इनमें मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर जैसी रिजर्व करेंसी शामिल होती हैं, जबकि कुछ हिस्सा यूरो, जापानी येन और पाउंड स्टर्लिंग में भी होता है।
रुपये में तेज उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए RBI समय-समय पर डॉलर की खरीद-बिक्री कर लिक्विडिटी मैनेजमेंट के जरिए बाजार में हस्तक्षेप करता है।
RBI का भरोसा: बाहरी स्थिति मजबूत
हाल ही में हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद RBI ने कहा था कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 11 महीने से अधिक के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, देश का एक्सटर्नल सेक्टर मजबूत बना हुआ है और बाहरी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने की पूरी क्षमता मौजूद है।
बीते वर्षों में फोरेक्स रिजर्व का ट्रेंड
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2025: करीब $5,600 करोड़ की बढ़ोतरी
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2024: लगभग $2,000 करोड़ की बढ़ोतरी
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2023: करीब $5,800 करोड़ का इजाफा
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2022: लगभग $7,100 करोड़ की गिरावट
कुल मिलाकर, हालिया गिरावट के बावजूद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत स्थिति में बना हुआ है, हालांकि गोल्ड रिजर्व में उतार-चढ़ाव पर आगे भी नजर बनी रहेगी।
