दुर्ग पुलिस ने एनपीएस से जुड़ी 1.19 करोड़ की बीमा धोखाधड़ी का किया खुलासा, जीवित लोगों को मृत दिखाकर निकाली गई राशि

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पुलिस ने राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। दुर्ग पुलिस ने करीब 1 करोड़ 19 लाख रुपये की बीमा राशि की धोखाधड़ी के मामले में मुख्य आरोपी राजेश कनोजिया (44) को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है।

आरोप है कि जीवित व्यक्तियों को मृत दर्शाकर फर्जी मृत्यु दावा (Death Claim) प्रस्तुत किया गया और बीमा राशि की अवैध निकासी की गई।

ऑनलाइन सेवा केंद्र संचालक है आरोपी

गिरफ्तार आरोपी राजेश कनोजिया बोरसी, दुर्ग का रहने वाला है और इलाके में ऑनलाइन सेवा केंद्र संचालित करता है। पुलिस जांच में सामने आया है कि वह एनपीएस निकासी के नाम पर ग्राहकों से आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक संबंधी जानकारी एकत्र करता था और बाद में इन्हीं जानकारियों का उपयोग कर फर्जी दस्तावेज तैयार करता था।

नकद और डिजिटल साक्ष्य जब्त

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 10 हजार रुपये नकद के साथ-साथ फर्जी दस्तावेजों से जुड़े डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए हैं। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह में अन्य लोग भी शामिल हैं, जिनकी तलाश जारी है।

HDFC लाइफ कंपनी की शिकायत से खुला मामला

पुलिस के अनुसार, 16 फरवरी 2026 को HDFC Life Insurance Company Limited बोकारो (झारखंड) के प्रबंधक ने लिखित आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि एनपीएस खातों से जुड़े फर्जी मृत्यु दावों के जरिए लगभग 1.19 करोड़ रुपये की अनुचित निकासी की गई है।

फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और आधार का इस्तेमाल

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र, फर्जी आधार कार्ड और अन्य केवाईसी दस्तावेज तैयार कर बीमा कंपनी के समक्ष प्रस्तुत किए।
एक मामले में तो सेवानिवृत्त कर्मचारी के नाम पर मृत्यु दावा दाखिल किया गया, जबकि जांच में संबंधित व्यक्ति पूरी तरह जीवित पाया गया।

कंपनी के पूर्व कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध

मामले में बीमा कंपनी के पूर्व कर्मचारी राजेश कुमार ठाकुर की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। आरोप है कि उसने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए जाली दस्तावेज अपलोड किए और सत्यापन प्रक्रिया को नजरअंदाज किया।

पुलिस जांच जारी

दुर्ग पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकती है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस गिरोह ने इसी तरह के और कितने फर्जी दावे किए हैं।