एमवाय अस्पताल इंदौर में शुरू हुई मुफ्त बेरियाट्रिक सर्जरी, मध्य प्रदेश में पहली सरकारी पहल

एमवाय अस्पताल ने एक नई स्वास्थ्य पहल की शुरुआत करते हुए मोटापे से जूझ रहे मरीजों के लिए बेरियाट्रिक सर्जरी पूरी तरह निशुल्क शुरू कर दी है। इसके साथ ही यह अस्पताल मध्य प्रदेश का पहला सरकारी अस्पताल बन गया है, जहां यह सुविधा मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही है।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार 23 फरवरी से राजेंद्र धारकर ओपीडी में विशेष बेरियाट्रिक क्लीनिक की शुरुआत होगी, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर नियमित रूप से मरीजों की जांच और परामर्श करेंगे।
आयुष्मान योजना के तहत मिलेगा मुफ्त इलाज
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि अधिक वजन और उससे जुड़ी गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों की सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पूरी तरह निशुल्क की जाएगी। जिन मरीजों के पास आयुष्मान कार्ड नहीं है, उन्हें भी सरकारी रियायती दरों पर ऑपरेशन की सुविधा दी जाएगी।
निजी अस्पतालों में 5 से 6 लाख तक खर्च
डॉक्टरों के मुताबिक निजी अस्पतालों में इसी तरह की बेरियाट्रिक सर्जरी पर 5 से 6 लाख रुपये तक का खर्च आता है। ऐसे में सरकारी अस्पताल में यह सुविधा मुफ्त मिलने से मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को बड़ी राहत मिली है।
सफल सर्जरी से मिली राहत
हाल ही में इंदौर की 30 वर्षीय महिला मरीज ने अस्पताल में परामर्श लिया, जिनका वजन 120 किलोग्राम था। जांच में उन्हें डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर सहित कई गंभीर बीमारियां पाई गईं।
इसके बाद 12 फरवरी को उनकी लेप्रोस्कोपिक मिनी गैस्ट्रिक बायपास सर्जरी की गई। स्वास्थ्य में सुधार के बाद 17 फरवरी को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
सर्जरी करीब दो घंटे तक चली, जिसमें डीन और वरिष्ठ सर्जन डॉ. अरविंद घनघोरिया के साथ डॉ. अजय गंगजी, डॉ. नवीन गुप्ता और डॉ. आशीष मिश्रा सहित मेडिकल टीम शामिल रही। ऑपरेशन के अगले ही दिन मरीज को चलने-फिरने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
दो साल बाद फिर शुरू हुई नियमित सेवा
डॉ. घनघोरिया ने बताया कि एमवाय अस्पताल में बेरियाट्रिक सर्जरी की शुरुआत करीब 10 साल पहले हुई थी, लेकिन पिछले दो वर्षों से यह सेवा बंद थी। अब मोटापे के बढ़ते मामलों को देखते हुए इसे फिर से नियमित रूप से शुरू किया जा रहा है।
23 फरवरी से विशेषज्ञ ओपीडी में मरीजों की जांच कर आगे की प्रक्रिया तय करेंगे।
यह पहल मोटापे से जूझ रहे मरीजों के लिए सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में एक बड़ा और राहत भरा कदम माना जा रहा है।