21 फरवरी 2026 : अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्लोबल टैरिफ पॉलिसी को अवैध करार दिया, क्योंकि उन्होंने अपने अधिकारों का दायरा पार किया। 6-3 के फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन को टैरिफ में बदलाव करना पड़ा। अब 24 फरवरी 2026 से 150 दिनों के लिए सभी आयात पर केवल 10% अस्थायी टैरिफ लगेगा, जिससे भारत समेत अन्य देशों को राहत मिलेगी।
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की ग्लोबल टैरिफ पॉलिसी को बड़ा झटका देते हुए उसे अवैध करार दिया है। 6-3 के बहुमत से दिए गए फैसले में मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स (John Roberts) ने कहा कि राष्ट्रपति ने दुनिया भर के देशों पर व्यापक टैरिफ लगाते समय अपने अधिकारों का दायरा पार कर लिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन को अपनी टैरिफ पॉलिसी में बदलाव करना पड़ा है। यह फैसला ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के अहम आर्थिक एजेंडे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने 20 फरवरी को एक नई घोषणा जारी की। इस घोषणा के अनुसार 24 फरवरी 2026 से 150 दिनों के लिए अमेरिका में आयात होने वाले सभी प्रोडक्ट्स पर 10 प्रतिशत का अस्थायी आयात अधिभार (इंपोर्ट सरचार्ज) लगाया जाएगा। इसका मतलब यह है कि अब भारत सहित अन्य देशों के सामान पर केवल 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगेगा। पहले यह दर कहीं ज्यादा थी।
भारत के लिए यह फैसला राहत भरा माना जा रहा है। इससे पहले अमेरिका ने अगस्त में भारत पर 25 प्रतिशत ‘रिसिप्रोकल टैरिफ’ लगाया था। इसके बाद रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण 25 प्रतिशत अतिरिक्त पैनाल्टी टैरिफ भी लगाया गया था। इस तरह कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था। हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा तैयार हुआ, जिसके तहत अमेरिका ने 25 प्रतिशत पैनाल्टी टैरिफ हटा दिया था। इसके बाद प्रभावी टैरिफ 25 प्रतिशत रह गया था। अब नए आदेश के बाद भारतीय उत्पादों पर केवल 10 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगेगा।
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) के महानिदेशक अजय सहाय के अनुसार, अब भारतीय सामान पर 10 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगेगा, जो पहले 25 प्रतिशत था। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी प्रोडक्ट पर पहले से 5 प्रतिशत ‘एमएफएन ड्यूटी’ (सामान्य आयात टैरिफ) लगती है, तो अब उस पर कुल 15 प्रतिशत (5% + 10%) शुल्क लगेगा। पहले यह 30 प्रतिशत (5% + 25%) हो जाता था। इससे भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी और वे अमेरिकी बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन पाएंगे।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, अब यह 10 प्रतिशत का टैरिफ भारत के अमेरिका को होने वाले कुल निर्यात के करीब 55 प्रतिशत हिस्से पर ही लागू होगा। करीब 40 प्रतिशत सामान पहले से ही छूट की कैटेगरी में है। हालांकि, स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर पर 50 प्रतिशत तथा कुछ ऑटो कंपोनेंट्स पर 25 प्रतिशत का सेक्टोरल टैरिफ अभी भी जारी रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने कहा कि भारत के साथ हुए व्यापार समझौते में कोई बदलाव नहीं होगा और इंडिया डील जारी है। इससे पहले जब अंतरिम समझौते की घोषणा हुई थी, तब ट्रंप ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी कर भारत पर रूस से तेल खरीदने को लेकर लगाया गया 25 प्रतिशत पैनाल्टी टैरिफ हटा दिया था। उन्होंने कहा था कि भारत ने रूस से सीधे या परोक्ष रूप से ऊर्जा आयात कम करने और अमेरिकी ऊर्जा खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है।
पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है। 2021-25 के दौरान अमेरिका भारत के कुल निर्यात का करीब 18 प्रतिशत हिस्सा रहा। वहीं, आयात में इसकी हिस्सेदारी 6.22 प्रतिशत और कुल द्विपक्षीय व्यापार में 10.73 प्रतिशत रही। वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 186 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें भारत का निर्यात 86.5 अरब डॉलर और आयात 45.3 अरब डॉलर रहा। कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट के फैसले और नए 10 प्रतिशत अस्थायी अधिभार के बाद भारत को बड़ी राहत मिली है। इससे भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है और दोनों देशों के व्यापारिक संबंध और मजबूत होने की उम्मीद है।
