संजू पैकरा/सारंगढ़
छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी 15 वे वित्त योजना जो ग्रामपंचायतो की तस्वीर बदलनेक लिए हैं अब भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ती नजर आ रही है जनपद पंचायत सारंगढ़ के ग्रामपचायत रिवापार की हैं जहां सरपंच और सचिव मिलकर सरकारी खजाने में ऐसी सेंध लगाई है कि विकास कार्य कागजों पर सिमट के रह गई
GST नियमों का धज्जियां शासन को लगाया चूना
नियमों के मुताबिक 15 वे वित्त की राशि को नाली बोर जल संरक्षण जैसे कार्यों में व्यय करना होता है इनके लिए भुगतान केवल वे फर्मों को किया जा सकता है जिसके पास जीवित GST रजिस्ट्रेशन टीन नंबर हो
लेकिन रिवापार ग्रामपंचायत में कायदे कानून को ताक में रख कर फर्जी बिलों का खेल खेला गया सिर्फ पैसे गबन करने के मंशा से GST बिल के सहारे लखों रुपए का आहरण कर लिया गया जिसके पास कोई फार्म या किसी प्रकार की सामग्री मलक दुकान नहीं है जिससे न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ बल्कि शासन को भी गुमराह किया गया सिर्फ GST बिल छपवा कर कागजों में फॉर्म बताएगया जबकि जमीनी स्तर पर फॉर्म कार्य ठप है
विकास शून्य : जमीन पर कोई काम नहीं हुआ, जिससे ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है।
भ्रष्ट गठजोड़ : सरपंच और सचिव ने आपसी मिलीभगत से शासन को गुमराह कर अपनी जेबें भरी हैं।
अधिकारियों की ‘मौन’ सहमति या संरक्षण? हैरानी की बात यह है कि सारंगढ़ जनपद की कई पंचायतों में भ्रष्टाचार की खबरें लगातार प्रकाशित हो रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या इन भ्रष्टाचारियों को जनपद के उच्च अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है? बार-बार शिकायतों के बावजूद कार्यवाही न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गहरा संदेह पैदा करता है।
उक्त विषय पर सरपंच पति ने बताया की बिल व्हाउचर लगा है जो ग्राम डंगनिया का ही है।
