रायपुर। राजधानी स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर को बड़ी शैक्षणिक उपलब्धि मिली है। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए मेडिकल कॉलेज में डीएम-कार्डियोलॉजी (सुपर स्पेशियलिटी) की दो पीजी सीटों को मंजूरी प्रदान की है। इससे राज्य में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
हालांकि इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन ने डीएम कोर्स करने वाले डॉक्टरों के स्टाइपेंड और अलग कैडर व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठाए हैं।
विशेषज्ञ समिति की समीक्षा के बाद मिली अनुमति
मेडिकल कॉलेज द्वारा आवेदन पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति हेल्थ साइंसेज और आयुष विश्वविद्यालय, रायपुर के माध्यम से प्रस्तुत किया गया था। इसके बाद एनएमसी के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड ने कॉलेज की स्व-मूल्यांकन रिपोर्ट (SAF) और मूल्यांकनकर्ताओं की रिपोर्ट का परीक्षण किया।
विशेषज्ञ समिति की समीक्षा के बाद न्यूनतम मानकों के आधार पर डीएम-कार्डियोलॉजी की दो सीटों को मंजूरी दी गई।
प्रदेश में बढ़ेंगे हृदय रोग विशेषज्ञ
सुपर स्पेशियलिटी कोर्स शुरू होने से प्रदेश में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ने की संभावना है। इससे गंभीर हृदय रोगों के इलाज के लिए मरीजों को दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत कम हो सकती है। साथ ही राज्य में उन्नत हृदय चिकित्सा सेवाओं और रिसर्च गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
स्वास्थ्य मंत्री ने दी बधाई
इस उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन, चिकित्सकों और स्वास्थ्य विभाग की टीम को बधाई दी है।
स्टाइपेंड और कैडर को लेकर उठे सवाल
डीएम-कार्डियोलॉजी सीटों की मंजूरी के साथ ही छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन ने कहा है कि राज्य में अभी तक DM, MCH और DrNB डॉक्टरों के लिए अलग कैडर या स्टाइपेंड संरचना तय नहीं की गई है।
फेडरेशन के अनुसार कई जगहों पर सुपर स्पेशियलिटी कोर्स कर रहे डॉक्टरों को भी एमडी या एमएस पीजी रेजिडेंट के बराबर ही स्टाइपेंड मिल रहा है, जबकि DM कोर्स एमडी के बाद किया जाने वाला उच्च स्तर का विशेषज्ञता कोर्स है।
