12 अक्टूबर 2026 : चीन इन दिनों सोने की खरीद पर जमकर पैसा खर्च कर रहा है. 2026 के पहले 8 महीनों में ही चीन ने 1,000 टन से ज्यादा सोना आयात किया. इस पर चीन ने रिकॉर्ड 158.8 अरब डॉलर खर्च किए. भारतीय रुपये में यह रकम 15 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है. चीन ने पूरे 2025 में 886 टन सोना आयात किया था, लेकिन इस साल वह आठ महीनों में ही पिछले साल का आंकड़ा पार कर चुका है. इतना ही नहीं, चीन का सेंट्रल बैंक लगातार 23 महीने से सोने का रिजर्व बढ़ा रहा है. सितंबर 2026 में उसने करीब 23 टन सोना खरीदा, जो लगभग तीन साल में उसकी सबसे बड़ी मासिक खरीद बताई गई है. चीन की इस खरीद के पीछे सिर्फ सोने की कीमतों से मुनाफा कमाने की सोच नहीं है. वह अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर अपनी निर्भरता घटाना चाहता है. दूसरी ओर, चीन की कमजोर प्रॉपर्टी मार्केट, शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और बैंक जमा पर कम रिटर्न के कारण आम लोग भी सोने को निवेश के ऑप्शन के तौर पर देख रहे हैं. अब चीन के सोने के भंडार को लेकर एक और बड़ी चर्चा शुरू हो गई है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, चीन दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा आधिकारिक गोल्ड होल्डर देश है और अगर उसकी खरीदारी इसी रफ्तार से जारी रही, तो वह इस साल फ्रांस और इटली को पीछे छोड़कर तीसरे स्थान पर पहुंच सकता है.
दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा गोल्ड होल्डर
द कोबेसी लेटर के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 तक चीन के आधिकारिक सोने का भंडार बढ़कर 2,410 टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. इसमें सितंबर में सेंट्रल बैंक की ओर से खरीदा गया 23 टन से ज्यादा सोना भी शामिल है. फिलहाल आधिकारिक गोल्ड रिजर्व के मामले में चीन से आगे अमेरिका, जर्मनी, इटली और फ्रांस हैं,आंकड़ों के अनुसार, फ्रांस के पास करीब 2,437 टन और इटली के पास लगभग 2,452 टन सोना है. यानी चीन को फ्रांस से आगे निकलने के लिए करीब 27 टन और इटली को पीछे छोड़ने के लिए करीब 42 टन अतिरिक्त सोने की जरूरत होगी. अगर चीन का सेंट्रल बैंक इसी तरह खरीदारी जारी रखता है, तो वह 2026 के अंत तक दोनों देशों को पीछे छोड़ सकता है. ऐसा होने पर अमेरिका और जर्मनी के बाद चीन दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा आधिकारिक गोल्ड होल्डर बन जाएगा. हालांकि, यह मौजूदा खरीदारी की रफ्तार पर आधारित अनुमान है.
डॉलर पर निर्भरता कम करना चाहता है चीन
चीन के सोना खरीदने की एक बड़ी वजह अपने विदेशी मुद्रा भंडार को अलग-अलग संपत्तियों में बांटना है. कई देश अपने भंडार का बड़ा हिस्सा अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में रखते हैं. लेकिन अंतरराष्ट्रीय तनाव के समय विदेशी संपत्तियों पर प्रतिबंध लगने का रिस्क भी रहता है.
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस के सेंट्रल बैंक की कई विदेशी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया था. इसके बाद दूसरे देशों के लिए भी अपने विदेशी भंडार की सुरक्षा एक अहम मुद्दा बन गया. अपने देश के भंडार में रखा सोना इस तरह के रिस्क से कुछ हद तक बचाव दे सकता है.
अमेरिकी ट्रेजरी के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में चीन के पास अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की रकम घटकर 618 अरब डॉलर रह गई, जो करीब 18 साल का निचला स्तर था. ऐसे में चीन की सोना खरीद को डॉलर पर निर्भरता घटाने और अपने विदेशी करेंसी रिजर्व में बदलाव करने की स्ट्रैटजी के तौर पर देखा जा रहा है.
खरीदारों और कारोबारियों की मांग बढ़ी
चीन में सोने की मांग बढ़ने की वजह सिर्फ सेंट्रल बैंक की खरीद नहीं है. आम लोग और कंपनियां भी सोने में निवेश कर रहे हैं. इसकी एक वजह देश की अर्थव्यवस्था में बनी सुस्ती है. चीन का प्रॉपर्टी बाजार लंबे समय से दबाव में है. पहले घर खरीदना आम लोगों के लिए संपत्ति बनाने का बड़ा जरिया था, लेकिन अब इस बाजार में भरोसा कमजोर पड़ा है.
शेयर बाजार में भी उतार-चढ़ाव बना हुआ है. दूसरी तरफ, बैंक जमा और सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न कम होने से निवेशकों के सामने आकर्षक ऑप्शन भी लीमिटेड हो गए हैं. ऐसे में लोग सोने के गहने, सिक्के और गोल्ड बार खरीदकर अपनी बचत का कुछ हिस्सा सुरक्षित रखना चाहते हैं.
चीन में सोने की घरेलू मांग बढ़ने का असर आयात पर भी दिख रहा है. 2026 के पहले आठ महीनों में एक हजार टन से ज्यादा सोना आयात करना इसी मजबूत मांग का संकेत है. हालांकि, आयात में सेंट्रल बैंक के अलावा निजी खरीदारों और कारोबारियों की मांग भी शामिल होती है.
सोने की कीमतों को कैसे मिल रहा है सहारा?
सोने की कीमतें कई कारकों से प्रभावित होती हैं. अमेरिकी ब्याज दरें, डॉलर की चाल, दुनिया में बढ़ता तनाव और सेंट्रल बैंकों की खरीद इनमें अहम हैं. आमतौर पर जब बैंक जमा या सरकारी बॉन्ड से ज्यादा रिटर्न मिलने लगता है, तो सोने की मांग पर दबाव पड़ सकता है, क्योंकि सोना अपने आप ब्याज नहीं देता. लेकिन चीन जैसे बड़े बाजार में लगातार खरीदारी रहने से सोने की कीमतों को सहारा मिल सकता है. सेंट्रल बैंक आम तौर पर लंबे समय के लिए सोना खरीदते हैं और वे रोजाना होने वाले भाव के उतार-चढ़ाव से आम निवेशकों की तुलना में कम प्रभावित हो सकते हैं.
फिर भी, सोने की कीमतों में आगे तेजी जारी रहेगी, इसकी गारंटी नहीं है. अगर चीन की अर्थव्यवस्था में सुधार होता है और लोग फिर से प्रॉपर्टी या शेयर बाजार में निवेश बढ़ाते हैं, तो सोने की मांग घट सकती है. ब्याज दरें बढ़ने या युआन कमजोर होने से भी घरेलू खरीद पर असर पड़ सकता है. चीन की सोना खरीद सिर्फ निवेश का मामला नहीं है.
यह देश के विदेशी भंडार को सुरक्षित रखने, डॉलर पर निर्भरता कम करने और घरेलू निवेशकों की बदलती पसंद से जुड़ी स्ट्रैटजी है. अगर यह खरीदारी जारी रहती है, तो चीन के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा आधिकारिक गोल्ड रिजर्व होने की संभावना बन सकती है.
