साइबर अपराधों पर कार्रवाई के साथ रोकथाम पर जोर, छत्तीसगढ़ पुलिस जनजागरूकता से बना रही सुरक्षा का मजबूत आधार

साइबर अपराधों पर कार्रवाई के साथ रोकथाम पर जोर, छत्तीसगढ़ पुलिस जनजागरूकता से बना रही सुरक्षा का मजबूत आधार*

अपराध होने से पहले नागरिकों को सतर्क करने की पहल, गांवों से शहरों तक पहुंच रहा साइबर सुरक्षा का संदेश

रायपुर, 18 अक्टूबर 2026/ डिजिटल तकनीक के विस्तार ने आम नागरिकों के जीवन को जितना सुविधाजनक बनाया है, साइबर अपराधों ने उतनी ही नई चुनौतियां भी खड़ी की हैं। मोबाइल बैंकिंग, ऑनलाइन भुगतान, सोशल मीडिया और इंटरनेट आधारित सेवाएं अब शहरों से लेकर गांवों तक दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं। इसके साथ ही ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, फर्जी निवेश, डिजिटल अरेस्ट और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरुपयोग जैसे अपराधों के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। इन परिस्थितियों में साइबर अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई जितनी आवश्यक है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है नागरिकों को पहले से इतना जागरूक बनाना कि वे धोखाधड़ी के प्रयासों को पहचान सकें और अपराध का शिकार होने से बच सकें। छत्तीसगढ़ में साइबर सुरक्षा को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली में इसी सोच को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन और उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ पुलिस साइबर अपराधों के विरुद्ध कार्रवाई के साथ उनकी रोकथाम के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित कर रही है। इसका उद्देश्य केवल अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि नागरिकों को साइबर अपराधों के तौर-तरीकों से परिचित कराकर उन्हें डिजिटल रूप से सुरक्षित और सतर्क बनाना भी है। पुलिस का प्रयास है कि साइबर सुरक्षा की जानकारी समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे, ताकि नागरिक स्वयं अपनी सुरक्षा करने के साथ दूसरों को भी जागरूक कर सकें।

अपराध होने से पहले रोकथाम की दिशा में व्यापक पहल

छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक संचालित सात सप्ताह का विशेष साइबर जागृति अभियान इसी दृष्टिकोण का उदाहरण है। प्रदेश की 34 पुलिस इकाइयों के माध्यम से चलाए गए इस अभियान में 5 लाख से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए और 1 करोड़ 70 लाख से अधिक नागरिकों तक सीधे साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया गया। अभियान में 5.5 लाख से अधिक जागरूकता सेल्फी के माध्यम से नागरिकों की सहभागिता भी दर्ज की गई।

साइबर अपराधों के नए तरीकों की दी जानकारी

इस अभियान की विशेषता इसकी व्यापक पहुंच और स्थानीय सहभागिता रही। पुलिस ने जागरूकता कार्यक्रमों को केवल शहरों और शैक्षणिक संस्थानों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि ग्राम पंचायतों, ग्राम सभाओं, हाट-बाजारों, धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक स्थलों तक पहुंचकर लोगों से सीधा संवाद किया। विद्यार्थियों, महिलाओं, ग्रामीणों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों को साइबर अपराधों के नए तरीकों की जानकारी दी गई।

नकली निवेश योजनाओं और बैंकिंग धोखाधड़ी से बचने के उपाय बताए गए

अभियान को सात विषय आधारित सप्ताहों में संचालित किया गया। इनमें डिजिटल सुरक्षा, यूपीआई एवं ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट, महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा, रोजगार संबंधी ठगी, डेटा गोपनीयता और सामूहिक साइबर सुरक्षा संकल्प जैसे विषय शामिल रहे। नागरिकों को संदिग्ध लिंक, फर्जी कॉल, नकली निवेश योजनाओं और बैंकिंग धोखाधड़ी से बचने के उपाय बताए गए। साथ ही ओटीपी, पासवर्ड और यूपीआई पिन जैसी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करने तथा डिजिटल अरेस्ट के नाम पर धमकाने वालों से सावधान रहने के लिए जागरूक किया गया। यह प्रयास इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि साइबर अपराधों में कई बार अपराधी तकनीकी कमजोरियों से अधिक नागरिकों की जानकारी के अभाव और भय का लाभ उठाते हैं। ऐसे में समय रहते सही जानकारी मिलना किसी व्यक्ति को आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी से बचा सकता है।

स्थानीय नवाचारों से गांवों और परिवारों तक पहुंची साइबर जागरूकता

साइबर जागृति अभियान में विभिन्न जिलों ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ऐसे नवाचार किए, जिनसे जागरूकता का संदेश सीधे समुदायों तक पहुंचा। मुंगेली जिले में ग्राम पंचायतों और विशेष ग्राम सभाओं के माध्यम से लगभग 15 हजार ग्रामीणों को साइबर सुरक्षा की जानकारी दी गई। गरियाबंद में मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्व-सहायता समूहों की लगभग 493 महिलाओं को जागरूक कर उनके माध्यम से परिवारों तक संदेश पहुंचाने की पहल की गई।

दुर्ग जिले में सुरक्षित दुर्ग, साइबर जागरूक दुर्ग अभियान के अंतर्गत विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटकों और अन्य गतिविधियों के माध्यम से 15 हजार से अधिक नागरिकों को जागरूक किया। जांजगीर-चांपा में एक राखी साइबर जागृति के नाम अभियान से लगभग 1 लाख 61 हजार लोगों तक संदेश पहुंचा। बिलासपुर में आकाशवाणी के लाइव फोन-इन कार्यक्रम के माध्यम से लगभग आठ लाख श्रोताओं को साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी मिली।

कोंडागांव में साइबर चेतना रथ, रायपुर में बिजली बिलों के माध्यम से साइबर ठगी संबंधी चेतावनी संदेश और रायगढ़ में लघु फिल्म प्रतियोगिता जैसे प्रयासों ने जागरूकता के नए माध्यम विकसित किए। इन पहलों से यह स्पष्ट हुआ कि साइबर सुरक्षा की जानकारी को स्थानीय परंपराओं, सामाजिक गतिविधियों और दैनिक जीवन से जोड़कर अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। विशेष रूप से महिलाओं, विद्यार्थियों और ग्रामीण समुदायों की भागीदारी ने अभियान को व्यापक स्वरूप दिया। इससे जागरूकता का संदेश केवल कार्यक्रम में उपस्थित व्यक्तियों तक सीमित न रहकर उनके परिवारों और आसपास के लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।

डिजिटल माध्यमों से भी व्यापक जागरूकता

साइबर जागृति अभियान में सोशल मीडिया का भी प्रभावी उपयोग किया गया। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के सहयोग से 3,100 से अधिक सोशल मीडिया पोस्ट साझा की गईं, जिन्हें 6.02 करोड़ से अधिक व्यूज प्राप्त हुए। रायपुर में आयोजित साइबर जागरूकता लघु फिल्म प्रतियोगिता में 11 राज्यों के 35 जिलों से 162 फिल्में प्राप्त हुईं। इन रचनात्मक प्रयासों के माध्यम से साइबर अपराधों के तरीकों और उनसे बचाव के संदेश को सरल तथा प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

युवाओं को साइबर प्रहरी के रूप में जोड़ने की पहल भी इसी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। इसका उद्देश्य युवाओं को स्वयं जागरूक बनाने के साथ उन्हें अपने परिवार और समाज में साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाने के लिए प्रेरित करना था।

जागरूकता के साथ साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर कार्रवाई

छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा साइबर अपराधों की रोकथाम के प्रयासों के समानांतर अपराधियों के नेटवर्क के विरुद्ध भी कार्रवाई की जा रही है। साइबर ठगी में उपयोग होने वाले म्यूल बैंक खातों, ऐसे खाते खुलवाने में संलिप्त बैंककर्मियों और फर्जी सिम उपलब्ध कराने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है।

राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के लिए किया जागरूक

उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने 9 अक्टूबर को रायपुर में आयोजित साइबर जागृति अभियान के अभिनंदन समारोह में बताया कि साइबर अपराधियों के नेटवर्क के विरुद्ध की गई कार्रवाई से साइबर अपराधों से संबंधित एफआईआर में कमी आई है और ठगी गई राशि की रिकवरी दर में वृद्धि हुई है। पुलिस द्वारा नागरिकों को साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। समय पर शिकायत से धोखाधड़ी की राशि को रोकने या वापस प्राप्त करने की संभावना बढ़ सकती है। इस प्रकार साइबर अपराधों के विरुद्ध कार्रवाई और अपराध होने से पहले नागरिकों को सतर्क करने के प्रयास एक-दूसरे के पूरक बन रहे हैं।

साइबर जागरूकता को निरंतर जारी रखने पर जोर

छत्तीसगढ़ पुलिस के साइबर जागृति अभियान की उपलब्धियों और जिलों के नवाचारों को प्रोत्साहित करने के लिए 9 अक्टूबर 2026 को रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में राज्यस्तरीय अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। इसमें मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा शामिल हुए। साइबर जागरूकता के क्षेत्र में अभिनव पहल करने वाले कोंडागांव, रायपुर, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, दुर्ग, गरियाबंद और मुंगेली जिलों को सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर कहा कि डिजिटल इंडिया के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता अत्यंत आवश्यक हो गई है। साइबर अपराधों से बचाव केवल पुलिस और शासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने साइबर जागृति अभियान को निरंतर जारी रखने और इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने पर जोर देते हुए कहा कि सात सप्ताह के विशेष अभियान का समापन साइबर जागरूकता के प्रयासों का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है।

उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने भी साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप को देखते हुए नागरिकों को लगातार जागरूक करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि पुलिस धार्मिक आयोजनों, ग्राम सभाओं, शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों तक पहुंचकर लोगों को साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी दे रही है। अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई के साथ जनजागरूकता को बढ़ाना साइबर सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

सतर्क नागरिक ही साइबर अपराधों के विरुद्ध सबसे मजबूत सुरक्षा

साइबर अपराधों की प्रकृति लगातार बदल रही है। अपराधी नई तकनीकों और तरीकों का उपयोग कर लोगों को धोखाधड़ी का शिकार बनाने का प्रयास करते हैं। ऐसे में अपराध होने के बाद जांच और कार्रवाई के साथ उसकी रोकथाम के लिए नागरिकों को पहले से तैयार करना आवश्यक है। छत्तीसगढ़ पुलिस का साइबर जागृति अभियान इसी दिशा में एक व्यापक प्रयास के रूप में सामने आया है। गांवों तक पुलिस की पहुंच, स्थानीय नवाचारों, महिलाओं और युवाओं की सहभागिता तथा डिजिटल माध्यमों के उपयोग से साइबर सुरक्षा की जानकारी को जनसामान्य तक पहुंचाया गया है।

साइबर अपराधों से प्रभावी सुरक्षा के लिए आवश्यक है कि प्रत्येक नागरिक डिजिटल लेनदेन में सतर्कता बरते, संदिग्ध गतिविधियों को पहचाने और किसी भी धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल शिकायत करे। जागरूकता के ऐसे प्रयासों की निरंतरता से साइबर अपराधों की रोकथाम को मजबूती मिल सकती है। छत्तीसगढ़ में साइबर सुरक्षा को लेकर किए जा रहे प्रयासों का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यही है कि पुलिस केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपराध होने से पहले ही नागरिकों को सावधान और सक्षम बनाने की दिशा में भी कार्य कर रही है। डिजिटल युग में सुरक्षित समाज के निर्माण के लिए यही दृष्टिकोण आवश्यक है।