PM मोदी के विदेशी दौरों का रिकॉर्ड नहीं होगा सार्वजनिक, दिल्ली हाईकोर्ट ने बताई बड़ी वजह

नई दिल्ली: 20 अक्टूबर 2026 :  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं से जुड़े विस्तृत रिकॉर्ड अब सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे। दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें भारतीय वायु सेना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की विदेश यात्राओं से संबंधित कुछ रिकॉर्ड सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की जानकारी सार्वजनिक होने से राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रधानमंत्री की शारीरिक सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

पीएम मोदी की विदेश यात्राओं के रिकॉर्ड पर कोर्ट का फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई जस्टिस अमित महाजन ने की। कोर्ट ने कहा कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले विमानों, एयरक्रू, साथ जाने वाले प्रतिनिधिमंडल और सुरक्षा कर्मियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी का खुलासा सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील हो सकता है।

दरअसल, रिटायर्ड कमोडोर लोकेश बत्रा ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं से संबंधित विस्तृत रिकॉर्ड मांगे थे। इसमें स्पेशल फ्लाइट रिटर्न्स (SFR) के पार्ट-I और पार्ट-II की जानकारी भी शामिल थी।

इन रिकॉर्ड में विमान, एयरक्रू, प्रधानमंत्री के साथ यात्रा करने वाले प्रतिनिधिमंडल और स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) के कर्मियों से संबंधित विवरण शामिल थे। कोर्ट ने माना कि ऐसी जानकारियों के सार्वजनिक होने से प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर कोर्ट ने क्या कहा?

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को महत्वपूर्ण बताया। कोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली एजेंसियां इस मामले में विशेष विशेषज्ञता रखती हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा संबंधी आकलन प्रक्रिया को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर सरकारी धन खर्च होने का मतलब यह नहीं है कि उनसे जुड़ी सभी जानकारियां सार्वजनिक कर दी जाएं। यदि किसी जानकारी के खुलासे से सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है, तो केवल सरकारी खर्च का तर्क देकर उसे सार्वजनिक करने का आदेश नहीं दिया जा सकता।

RTI आवेदन से शुरू हुआ था मामला

यह मामला जून 2018 में दायर एक RTI आवेदन से शुरू हुआ था। रिटायर्ड कमोडोर लोकेश बत्रा ने अप्रैल 2013 से जून 2018 के बीच भारतीय वायु सेना के विमानों से किए गए प्रधानमंत्रियों के विदेश दौरों का विवरण मांगा था।

भारतीय वायु सेना ने कुछ यात्राओं से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई, लेकिन स्पेशल फ्लाइट रिटर्न्स (SFR) के पार्ट-I और पार्ट-II का पूरा विवरण देने से इनकार कर दिया। इसके लिए सुरक्षा संबंधी चिंताओं और सूचना के खुलासे से जुड़ी कानूनी छूट का हवाला दिया गया था।

इसके बाद केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने निर्देश दिया था कि सुरक्षा कर्मियों के नाम हटाकर संबंधित SFR-II रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं। इस आदेश को चुनौती देते हुए वायु सेना के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (CPIO) ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया।

दिल्ली हाईकोर्ट ने CIC का आदेश क्यों रद्द किया?

मामले पर विचार करने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि SFR-II रिकॉर्ड का खुलासा करने का निर्देश उचित नहीं था। कोर्ट के मुताबिक, इन दस्तावेजों में मौजूद जानकारी प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था और विदेश यात्राओं के दौरान अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों से संबंधित संवेदनशील विवरण उजागर कर सकती है।

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश को रद्द कर दिया। इस फैसले के साथ प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं से जुड़े संबंधित विस्तृत सुरक्षा रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने का निर्देश प्रभावी नहीं रहा।