बिलासपुर | छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में ट्रेन में चेन पुलिंग के आरोप में सजा पाए टीटीई को बरी कर दिया है। करीब 15 साल पुराने इस मामले में कोर्ट ने विभागीय जांच को त्रुटिपूर्ण मानते हुए सभी आदेशों को निरस्त कर दिया है।
मामला 15 जुलाई 2010 का है, जब बिलासपुर स्टेशन से यशवंतपुर एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 2252) में यात्री के रूप में सफर कर रहे टीटीई आस्टिन हाइड ने ट्रेन की चेन दो बार खींची। उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने ऐसा अपने परिवार की महिलाओं और सामान को ट्रेन में चढ़ाने के लिए किया। रेलवे की विभागीय जांच में दो आरपीएफ जवानों के गवाही के आधार पर उन्हें दोषी मानते हुए वर्ष 2012 में दो वेतनवृद्धि रोकने, डिमोशन और दो साल के वेतन कटौती की सजा दी गई।
टीटीई ने इस कार्रवाई के खिलाफ विभागीय अपील और पुनरीक्षण अपील की, जो खारिज हो गई। बाद में उन्होंने कैट (केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण) जबलपुर बेंच में चुनौती दी, जहां से मामला खारिज हो गया। वर्ष 2024 में उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर विभागीय कार्रवाई और कैट के निर्णय को चुनौती दी।
🔍 आरोप साबित नहीं हुए
याचिकाकर्ता की ओर से यह दलील दी गई कि रेलवे अधिनियम 1989 की धारा 141 के अनुसार, ट्रेन में चेन पुलिंग तभी अपराध मानी जाती है जब वह बिना उचित और पर्याप्त कारण के की गई हो। इस मामले में आरपीएफ गवाहों ने सिर्फ चेन खींचने की बात कही थी, लेकिन यह साबित नहीं किया गया कि कार्य अनुचित या दुर्भावनापूर्ण था।
⚖️ हाईकोर्ट ने कही यह बात
जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा:
> “चेन पुलिंग अपने आप में अपराध नहीं है। जब तक यह सिद्ध न हो कि कर्मचारी ने बिना कारण यह कार्य किया है, तब तक यह कदाचार नहीं माना जा सकता। विभागीय अधिकारी आरोप स्पष्ट रूप से साबित करने में असफल रहे।”
कोर्ट ने 2012, 2013, 2014 और 2023 में दिए गए सभी निर्णयों को रद्द कर दिया और टीटीई आस्टिन हाइड को दी गई सभी सजा समाप्त कर दी।
