छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 21 सप्ताह की गर्भवती रेप पीड़िता को गर्भसमापन की अनुमति

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक नाबालिग बलात्कार पीड़िता को 21 सप्ताह की गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति दे दी है। जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू की बेंच ने यह आदेश देते हुए कहा कि गर्भ को जारी रखना पीड़िता की शारीरिक अखंडता, मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर गंभीर प्रभाव डालेगा, जो उसके मूल अधिकारों का उल्लंघन होगा।

छत्तीसगढ़ सरकार की कैबिनेट बैठक 3 दिसंबर को, कई बड़े फैसलों पर होगी चर्चा

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पीड़िता बलात्कार की शिकार है और वह बलात्कारी के बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती। न्यायालय ने कहा कि गर्भपात कराना उसका निजी फैसला है और यह उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अभिन्न हिस्सा है, जिसका सम्मान किया जाना चाहिए।

गर्भ जारी रखने से पीड़िता को गंभीर खतरा: कोर्ट

बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि गर्भावस्था को जारी रखने से पीड़िता के शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और मानसिक स्वास्थ्य पर विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है। कोर्ट ने कहा कि समाज भी पीड़िता और उसके बच्चे को सम्मानजनक दृष्टि से नहीं देखेगा, जिससे पीड़िता की मानसिक पीड़ा और बढ़ सकती है।

अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट में डॉक्टरों ने बताया था कि पीड़िता की गर्भकाल आयु 21 सप्ताह 1 दिन है और मेडिकल रूप से गर्भसमापन किया जा सकता है।

“आज की टॉप वायरल खबरें पढ़ें—एलन मस्क का बयान, AI ट्रेन वीडियो का सच, इंडिया पोस्ट विवाद, फ्रूट ग्रेवी मोमो ट्रेंड और सोशल मीडिया बहस।”

कानून भी देता है राहत – Act 1971

कोर्ट ने अपने आदेश में गर्भ के चिकित्सीय समापन अधिनियम , 1971 की धारा 3 का हवाला दिया, जिसमें 24 सप्ताह तक गर्भपात की अनुमति दी गई है, यदि:

  • गर्भावस्था जारी रहने से महिला के जीवन को खतरा हो,

  • उसके शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचे,

  • या यदि बच्चे में जन्मजात गंभीर विकलांगता का खतरा हो।

कोर्ट ने कहा कि बलात्कार से गर्भ ठहरने के मामले में यह पीड़ा अपने आप में महिला के मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर क्षति पहुंचाने वाली स्थिति मानी जाएगी।

CG PSC- राज्य सेवा परीक्षा 2025: 238 पदों पर भर्ती, 1 से 30 दिसंबर तक आवेदन, नोटिफिकेशन जारी

अस्पताल को सुरक्षित तरीके से गर्भसमापन के निर्देश

न्यायालय ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को देखते हुए अस्पताल को निर्देश दिया है कि पीड़िता का गर्भसमापन सुरक्षित तरीके से, विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में कराया जाए।