रायपुर 05 दिसम्बर 2025 : रायपुर से BJP सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि सरकार बिना अध्ययन, बिना जनसुनवाई के फैसले ले रही है। ये प्रदेश की आर्थिक रीढ़ पर सीधी चोट है। इसका असर जनता, किसानों और छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि नई कलेक्टर गाइडलाइन पर फैसले को लेकर सरकार पूरी तरह कन्फ्यूज है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को रेवेन्यू डिपार्टमेंट के एक्सपर्ट्स, रियल एस्टेट प्रतिनिधियों और किसानों के संगठनों को मिलाकर एक हाई-लेवल कमेटी बनानी चाहिए।
वहीं पूर्व CM भूपेश बघेल ने कहा कि था कि सुना है कि जमीन खरीदी पर अव्यवहारिक गाइडलाइन रेट लादने वाले मंत्री जी ने कहा है कि यह ऊपर से अप्रूव हो चुका है। प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि राज्य के कैबिनेट से ‘ऊपर’ कौन है?
बृजमोहन अग्रवाल ने लिखा था कि प्रदेश में बिना किसी जन-परामर्श, बिना किसी वास्तविक मूल्यांकन और बिना सामाजिक-आर्थिक प्रभावों की समीक्षा के कलेक्टर गाइड लाइन दरों में अनियोजित वृद्धि कर दी गई है। इससे पूरे प्रदेश में अनेक वर्गों में असंतोष उफान पर है।
अग्रवाल ने लिखा कि किसान, छोटे व्यवसायी, कुटीर-उद्यमी, मध्यम वर्ग, छोटे रियल एस्टेट क्षेत्र और निवेशक निर्णय के खिलाफ हैं। व्यापक विरोध को देखते हुए यह निर्णय किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। यह वृद्धि ‘‘इज ऑफ लिविंग” और ‘‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस” दोनों के विपरीत है। प्रदेश की आर्थिक रीढ़ पर सीधी चोट है।
रायपुर से बीजेपी सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने CM विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर निर्णय को तत्काल स्थगित करने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि नई गाइडलाइन से भूमि अधिग्रहण में ज्यादा मुआवजा मिलने की बात भ्रामक है। इससे केवल 1% किसानों को फायदा होगा, जबकि 99% जनता पर आर्थिक बोझ पड़ेगा।
अग्रवाल ने कहा था कि प्रदेश में जमीन की खरीद-फरोख्त पहले ही मंद है। किसानों और मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में गाइडलाइन में बढ़ोतरी से स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क बढ़ जाएगा, जिससे जमीन लेना और मुश्किल हो जाएगा।
