छत्तीसगढ़ में आरक्षक भर्ती पर बड़ा हंगामा: हजारों अभ्यर्थी बोले—कम अंक वालों को दे दी नौकरी

छत्तीसगढ़ में आरक्षक भर्ती परीक्षा भी विवादों में आ गई है। लिखित परीक्षा के परिणाम जारी होने के बाद प्रदेशभर के अभ्यर्थियों ने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी, भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी के गंभीर आरोप लगाए हैं। गुरुवार को कई अभ्यर्थी बिलासपुर हाईकोर्ट पहुंचे, जहां वे याचिका दाखिल करने की तैयारी में थे। इस दौरान जब वे कोर्ट गेट के बाहर चर्चा कर रहे थे, तो पुलिस ने उन्हें हटाकर वहां से जाने को कहा।

शुक्रवार को हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे अभ्यर्थी

पुलिस द्वारा हटाए जाने के बाद अभ्यर्थी देर शाम पुलिस ग्राउंड में एकत्रित हुए। यहां सभी ने बैठक कर यह निर्णय लिया कि वे शुक्रवार को सामूहिक रूप से याचिकाएं दाखिल करेंगे। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई है, जिसके कारण योग्य अभ्यर्थी चयन सूची से बाहर कर दिए गए।

कम अंक वालों का चयन, मेरिट को किया गया नजरअंदाज: आरोप

अभ्यर्थियों का आरोप है कि चयन सूची में कई ऐसे नाम शामिल हैं, जिन्होंने उनसे कम अंक प्राप्त किए हैं। वहीं, मेरिट में आए योग्य उम्मीदवारों के नाम सूची में नहीं हैं। इससे अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया को संदिग्ध बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

5967 पदों पर हुई थी भर्ती प्रक्रिया

प्रदेश के 33 जिलों में कुल 5967 आरक्षक पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया चलाई गई थी। 9 दिसंबर को जिला स्तर पर चयन सूची जारी होने के बाद से ही गड़बड़ियों का सिलसिला सामने आने लगा। इसके बाद हजारों अभ्यर्थियों ने जिला स्तर पर बैठकें कर दस्तावेज और सबूत इकट्ठा किए।

11 दिसंबर को बिलासपुर पहुंचे हजारों अभ्यर्थी

10 दिसंबर को जिला स्तर पर रणनीति बनाने के बाद 11 दिसंबर को प्रदेशभर से हजारों अभ्यर्थी बिलासपुर पहुंचे। यहां उन्होंने जिलेवार गड़बड़ी की सूची तैयार की, जिसे अब हाईकोर्ट में याचिका का आधार बनाया जाएगा।

अभ्यर्थियों की मांग— निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता

अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच नहीं होती, तब तक वे संघर्ष जारी रखेंगे। उनका स्पष्ट आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और हेरफेर कर कुछ लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया है।