इंदौर। इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से 29 लोगों की मौत और 3300 से अधिक लोगों के बीमार होने के गंभीर मामले की अब न्यायिक जांच होगी। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक न्यायिक जांच आयोग का गठन किया है।
हाई कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि यह आयोग चार सप्ताह के भीतर अपनी अंतरिम रिपोर्ट हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के समक्ष प्रस्तुत करेगा। मामले में अगली सुनवाई 5 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।
दरअसल, भागीरथपुरा दूषित जल कांड को लेकर दायर पांच जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया था, जिसे मंगलवार देर शाम जारी किया गया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच अत्यंत आवश्यक है।
कोर्ट ने जिला प्रशासन, नगर निगम, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए हैं कि वे जांच आयोग को पूरा सहयोग दें और सभी आवश्यक दस्तावेज, रिकॉर्ड और जानकारी उपलब्ध कराएं।
न्यायिक आयोग भागीरथपुरा क्षेत्र में पानी के दूषित होने के कारणों, मृतकों की वास्तविक संख्या, प्रभावित लोगों की स्थिति, नगर निगम द्वारा स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के दावों की सत्यता सहित अन्य अहम बिंदुओं की जांच करेगा।
इसके साथ ही राज्य सरकार को आयोग के लिए कार्यालय, स्टाफ और आवागमन की समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। न्यायिक जांच से इस गंभीर घटना की जवाबदेही तय होने और पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
