नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में रविवार देर रात छात्र संगठनों के बीच हिंसक झड़प की सूचना सामने आई है। आरोप है कि वामपंथी विचारधारा से जुड़े छात्रों ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े छात्रों पर हथियार, लोहे की रॉड और लाठियों से हमला किया। इस घटना में कई छात्रों के गंभीर रूप से घायल होने की बात कही जा रही है।
🟥 ABVP का आरोप: लाइब्रेरी में पढ़ रहे छात्रों पर हमला
ABVP ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल @ABVPVoice के जरिए घटना की जानकारी साझा की। पोस्ट में कहा गया कि JNU कैंपस में “बेरहमी से हिंसा” की गई और पढ़ाई कर रहे छात्रों को निशाना बनाया गया। संगठन ने इसे टारगेटेड और आइडियोलॉजिकल हिंसा करार देते हुए तुरंत गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
🧨 स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में हमला, फायर एक्सटिंग्विशर और सिलेंडर इस्तेमाल का आरोप
ABVP का आरोप है कि स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज परिसर में JNU के स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के छात्र प्रतीक भारद्वाज पर हमला किया गया। आरोप के मुताबिक, पहले उन्हें फायर एक्सटिंग्विशर के पाउडर से अंधा किया गया और फिर बेरहमी से पीटा गया। यह भी दावा किया गया है कि हमले के दौरान सिलेंडर खोलकर जानलेवा तरीके से इस्तेमाल किया गया।
🗣️ ABVP नेताओं के बयान
JNUSU के जॉइंट सेक्रेटरी और ABVP नेता वैभव मीणा ने कहा,
“पिछले 7–8 दिनों से लेफ्ट विंग की हड़ताल चल रही थी। रात भर स्कूलों में आतंक फैलाया गया। 300–400 नकाबपोशों की भीड़ ने स्टडी रूम से छात्रों को खदेड़ा। विजय को 100–150 लोगों की भीड़ ने मॉब लिंच किया। दिल्ली पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया।”
वहीं, JNU मीडिया कन्वीनर और ABVP नेता विजय जायसवाल ने कहा,
“लेफ्ट विंग के लोगों ने ABVP कार्यकर्ताओं और छात्रों को टारगेट किया। यह पूरी तरह प्री-प्लान्ड हमला था। नकाबपोश लोग थे। दिल्ली पुलिस और JNU सिक्योरिटी मौजूद थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।”
⚠️ कुलगुरु के बयान को लेकर पहले से था तनाव
गौरतलब है कि JNU में हाल के दिनों में छात्र राजनीति पहले से ही गरमाई हुई है। कुलगुरु शांतिश्री डी. पंडित के कथित बयान को लेकर विवाद चल रहा है। रविवार को छात्र संघ ने ‘समता जुलूस’ निकालते हुए कुलगुरु से इस्तीफे और जवाबदेही की मांग की थी।
छात्र नेताओं का आरोप है कि कुलगुरु ने UGC के इक्विटी रेगुलेशन को लेकर एक वर्ग विशेष पर आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिससे विश्वविद्यालय की समावेशी परंपरा को ठेस पहुंची।
🔍 प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सवाल
हिंसक झड़प के बाद JNU प्रशासन और दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल, किसी आधिकारिक बयान या एफआईआर की पुष्टि नहीं हो पाई है।
📌 निष्कर्ष
JNU में हुई इस हिंसक घटना ने एक बार फिर कैंपस में सुरक्षा और छात्र राजनीति के मुद्दे को केंद्र में ला दिया है। सभी की निगाहें अब प्रशासन और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।
