रायपुर 27 फ़रवरी 2026 : छत्तीसगढ़ में आज 120 सरेंडर नक्सलियों के विधानसभा की कार्यवाही देखने की खबर को सरकार “मुख्यधारा में वापसी” और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है। यह घटना नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
राज्य सरकार के अनुसार, जिन 120 पूर्व नक्सलियों ने हथियार छोड़ दिए हैं, उन्हें लोकतंत्र की प्रक्रिया से जोड़ने के लिए छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही दिखायी गई। इसका उद्देश्य उन्हें यह समझाना है कि सरकार और जनता से जुड़ी नीतियाँ कैसे बनती हैं और लोकतंत्र कैसे काम करता है।
यह पहल राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और गृह विभाग की पुनर्वास नीति का हिस्सा बताई जा रही है, जिसमें सरेंडर करने वाले नक्सलियों को समाज में पुनः स्थापित करने, शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम
सरकार का मानना है कि नक्सलियों को लोकतांत्रिक व्यवस्था से परिचित कराने से उनमें विश्वास बढ़ेगा।
इससे यह संदेश भी दिया जा रहा है कि हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने वालों को सम्मान और अवसर मिलेंगे।
पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और नौकरी के अवसर दिए जा रहे हैं।
नक्सल सरेंडर की बढ़ती संख्या
पिछले कुछ समय में छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर नक्सलियों के आत्मसमर्पण के मामले सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, राज्य में सैकड़ों नक्सली सरकार की पुनर्वास योजनाओं से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौट रहे हैं।
सरकार ने 2026 तक राज्य को नक्सलमुक्त बनाने का लक्ष्य भी रखा है।
क्या संदेश देना चाहती है सरकार
इस पहल के जरिए सरकार यह दिखाना चाहती है कि
विकास और लोकतंत्र ही स्थायी समाधान हैं
हिंसा छोड़ने वालों को समाज में सम्मानजनक स्थान मिलेगा
सुरक्षा अभियान के साथ-साथ संवाद और पुनर्वास पर भी जोर है
अगर चाहें तो मैं आपको यह भी बता सकता हूँ कि सरेंडर नक्सलियों को छत्तीसगढ़ में कौन-कौन सी सुविधाएँ और आर्थिक सहायता दी जाती है।
