PMGSY के मुख्य अभियंता केके कटारे का जाति प्रमाण पत्र फर्जी घोषित, एसटी आरक्षण का लाभ लेने से अयोग्य

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) विभाग के मुख्य अभियंता केके कटारे का जाति प्रमाण पत्र जांच में फर्जी पाया गया है। राज्य की उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने उन्हें छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजाति (एसटी) के संवैधानिक आरक्षण का लाभ लेने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है।

समिति ने अपने आदेश में कहा है कि कटारे का मूल निवास महाराष्ट्र में होने के कारण वे छत्तीसगढ़ राज्य में एसटी आरक्षण का लाभ प्राप्त करने के पात्र नहीं हैं। इसी आधार पर उनके जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने का आदेश जारी किया गया है।

शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

यह मामला शिकायत के आधार पर जांच के लिए समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। शिकायतकर्ता विजय मिश्रा ने आरोप लगाया था कि केके कटारे ने दूसरे राज्य से संबंधित होने के बावजूद छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजाति वर्ग का लाभ लिया है।

इसके अलावा जनपद पंचायत डोंगरगांव के उपाध्यक्ष वीरेंद्र बोरकर ने भी इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। जांच के दौरान छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण में उपलब्ध दस्तावेजों की भी जांच की गई।

दस्तावेजों में महाराष्ट्र का पता मिला

जांच में सामने आया कि कटारे के पिता अविभाजित मध्यप्रदेश में वर्ष 1962 से 1993 तक शासकीय सेवा में कार्यरत रहे थे। वहीं कटारे द्वारा प्रस्तुत उनके पिता के कोषालय पेंशन से जुड़े दस्तावेजों में ग्राम एवं पोस्ट तुमसर, जिला भंडारा (महाराष्ट्र) का पता दर्ज पाया गया।

पूर्वजों के मूल निवास का प्रमाण नहीं

समिति के अनुसार कटारे ऐसा कोई ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके जिससे यह साबित हो सके कि उनके पिता या पूर्वज 10 अगस्त 1950 से पहले मध्यप्रदेश या वर्तमान छत्तीसगढ़ की भौगोलिक सीमा के मूल निवासी थे।

जांच के दौरान यह भी पता चला कि तुमसर नगर पालिका के वर्ष 1935 के जन्म पंजीयन रजिस्टर में कटारे के दादा का नाम दर्ज है, जिसमें उनकी जाति का उल्लेख भी किया गया है।

1978 में जारी प्रमाण पत्र निरस्त

समिति ने स्पष्ट किया कि उनकी जाति को लेकर संदेह नहीं है, लेकिन मूल निवास महाराष्ट्र में होने के कारण छत्तीसगढ़ में एसटी आरक्षण का लाभ लेने की पात्रता नहीं बनती।

उपलब्ध दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट के आधार पर समिति ने निष्कर्ष निकाला कि कटारे के पूर्वजों का मूल निवास वर्तमान महाराष्ट्र राज्य की सीमा में आता है। इसी आधार पर वर्ष 1978 में नायब तहसीलदार वारासिवनी, जिला बालाघाट (मध्यप्रदेश) द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया गया है।

समिति के अध्यक्ष सोनमणि बोरा के हस्ताक्षर से यह आदेश जारी किया गया है।